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8 MIN LESSON · SANSKRIT

Class 9 Sanskrit: Verbs and Tenses: Complete Concepts and Practice

संस्कृत — धातु, पुरुष-वचन, पठ् के लट्-लङ्-लृट्-लोट्-विधिलिङ् रूप, गम्-दृश्-स्था-भू-अस् के वर्तमान रूप, लभ् आत्मनेपद तथा वाक्य-पूर्ति।

परिचय

संस्कृत में धातु क्रिया का मूल आधार है और तिङन्त पद उसका पुरुष, वचन तथा लकार से बना रूप। पठ् पढ़ने का मूल अर्थ देता है, जबकि पठति, पठतः और पठन्ति बताते हैं कि एक, दो या अनेक अन्य व्यक्ति पढ़ते हैं। इसलिए क्रिया का सही रूप चुनने के लिए केवल हिंदी अनुवाद याद करना पर्याप्त नहीं।

“अहं पठति” में पढ़ने का अर्थ समझ आता है, लेकिन पुरुष का मेल गलत है। सही वाक्य “अहं पठामि” है। इस अध्याय में लट्, लङ्, लृट्, लोट् और विधिलिङ् के रूप, प्रमुख धातुओं के वर्तमान रूप तथा वाक्य-पूर्ति की विधि दी गई है। निर्धारित पाठ्यक्रम की धातु-सूची और अपेक्षित लकारों को प्राथमिकता दें।

अधिगम उद्देश्य

  • धातु और बने हुए क्रियापद में अन्तर करना।

  • प्रथम, मध्यम और उत्तम पुरुष को सही सर्वनाम से जोड़ना।

  • पाँच प्रमुख लकारों के अर्थ और रूप पहचानना।

  • पठ् के पूरे रूप तथा सामान्य धातुओं के लट् रूप लिखना।

  • विशेष धातु-आधार और परस्मैपद-आत्मनेपद का अन्तर समझना।

  • पुरुष, वचन और प्रसंग के अनुसार वाक्य सुधारना।

मुख्य अवधारणाएँ

1. पुरुष की संस्कृत व्यवस्था समझिए

संस्कृत का प्रथम पुरुष अन्य व्यक्ति के लिए है—सः, तौ, ते। मध्यम पुरुष सम्बोधित व्यक्ति के लिए—त्वम्, युवाम्, यूयम्। उत्तम पुरुष बोलने वाले के लिए—अहम्, आवाम्, वयम्। इसे अंग्रेज़ी व्याकरण की नामावली से भ्रमित न करें, जहाँ बोलने वाले को प्रथम व्यक्ति कहा जाता है।

क्रिया का पुरुष और वचन कर्ता के अनुसार चुनें। लिंग बदलने से सामान्य तिङन्त रूप नहीं बदलता—बालकः पठति और बालिका पठति। लेकिन बालिके पठतः में दो बालिकाएँ हैं, इसलिए द्विवचन चाहिए। कर्ता गायब हो तो क्रिया से उसका अनुमान मिलता है; पठामः हम अनेक के पढ़ने का संकेत है।

2. लट् में पठ् का पूरा रूप समझिए

लट् लकार सामान्यतः वर्तमान का बोध देता है। नीचे पठ् परस्मैपदी धातु की पूरी पुरुष-वचन सारणी है। प्रत्येक पंक्ति में एकवचन से द्विवचन और बहुवचन का अन्तर बोलकर अभ्यास करें।

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम

पठति

पठतः

पठन्ति

मध्यम

पठसि

पठथः

पठथ

उत्तम

पठामि

पठावः

पठामः

उदाहरण: “सः पुस्तकं पठति”, “युवां पुस्तकं पठथः” और “वयं पुस्तकं पठामः”। शब्दों के मेल में म् का अनुस्वार रूप दिख सकता है—युवाम् + पुस्तकम् से युवां पुस्तकम्। क्रिया-सारणी के मूल रूप को इस सन्धि-प्रयोग से अलग समझें। कर्म पुस्तकं एक होने पर भी अनेक कर्ताओं की क्रिया बहुवचन हो सकती है।

3. लङ् में भूतकाल और आगम देखें

लङ् लकार यहाँ सामान्य भूतकाल के अभ्यास में प्रयुक्त है। पठ् के रूप में अ का आगम और अलग प्रत्यय दिखाई देते हैं। इसे वर्तमान पठति के आगे केवल कल का शब्द लगा देने के बराबर न समझें।

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम

अपठत्

अपठताम्

अपठन्

मध्यम

अपठः

अपठतम्

अपठत

उत्तम

अपठम्

अपठाव

अपठाम

“ह्यः सः अपठत्” और “ह्यः वयम् अपठाम” में ह्यः का अर्थ बीता हुआ कल है। अपठत् और अपठत में अन्तिम हलन्त का अन्तर पुरुष-वचन बदल सकता है। इसलिए लिखने के बाद अन्तिम अक्षर पढ़ें। भूतकाल की संस्कृत व्यवस्था में दूसरे लकार भी हैं, पर यहाँ निर्धारित लङ् का प्रयोग केन्द्र में है।

4. लृट् में भविष्यत्काल बनाइए

लृट् लकार भविष्य की क्रिया बताता है। पठ् में पठिष्य आधार बनता है। सभी धातुओं में इसी पूरे आधार की नकल नहीं करनी चाहिए, लेकिन इस रूप से सामान्य पुरुष-वचन सम्बन्ध स्पष्ट होता है।

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम

पठिष्यति

पठिष्यतः

पठिष्यन्ति

मध्यम

पठिष्यसि

पठिष्यथः

पठिष्यथ

उत्तम

पठिष्यामि

पठिष्यावः

पठिष्यामः

“श्वः अहं पठिष्यामि” का अर्थ है मैं आने वाले कल पढ़ूँगा या पढ़ूँगी। श्वः भविष्यसूचक और ह्यः भूतसूचक है। अद्य वर्तमान दिन बताता है, लेकिन उसी दिन पहले हुआ या आगे होने वाला कार्य भी प्रसंग में सम्भव है। केवल एक समय-शब्द पर निर्भर रहने के बजाय पूरे वाक्य का समय समझें।

5. लोट् में आदेश, अनुरोध और संकल्प देखें

लोट् लकार आज्ञा, निवेदन या प्रेरणा में आता है। स्वर और सम्बोधन से उसका व्यवहार विनम्र या कठोर बन सकता है। “कृपया पठतु” अनुरोध हो सकता है; रूप मात्र से हर वाक्य को क्रोधपूर्ण आदेश न मानें।

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम

पठतु

पठताम्

पठन्तु

मध्यम

पठ

पठतम्

पठत

उत्तम

पठानि

पठाव

पठाम

“त्वं पठ” और “यूयं पठत” सम्बोधित व्यक्ति की संख्या के अनुसार बदलते हैं। “वयं पठाम” में सामूहिक प्रेरणा या संकल्प है। परस्मैपद मध्यम एकवचन पठ को हमेशा पठतु न करें; पठतु प्रथम पुरुष का रूप है। प्रश्न में आप जैसा आदरसूचक अनुवाद हो तो संस्कृत के निर्धारित प्रयोग और कर्ता को ध्यान से पढ़ें।

6. विधिलिङ् में सलाह और सम्भावना समझिए

विधिलिङ् उचित आचरण, सलाह, कामना या सम्भावना जैसे अर्थों में आ सकता है। अनुवाद में प्रायः चाहिए उपयोगी है, लेकिन हर वाक्य का अर्थ केवल एक हिंदी शब्द से तय नहीं होता।

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम

पठेत्

पठेताम्

पठेयुः

मध्यम

पठेः

पठेतम्

पठेत

उत्तम

पठेयम्

पठेव

पठेम

“छात्रः प्रतिदिनं पठेत्” का सामान्य अर्थ है विद्यार्थी को प्रतिदिन पढ़ना चाहिए। “वयं सत्यं वदेम” में हमें सत्य कहना चाहिए का आग्रह है। पठेत् और पठेत में हलन्त का अन्तर फिर महत्त्वपूर्ण है। रूप को क्रम में बोलना और छोटे वाक्य में प्रयोग करना अकेले प्रत्यय रटने से अधिक उपयोगी है।

7. प्रमुख धातुओं के पूरे लट् रूप

कुछ सामान्य धातुओं का वर्तमान आधार मूल धातु से बदला दिखाई देता है। गम् से गच्छ, दृश् से पश्य और स्था से तिष्ठ बनता है। इसलिए गमति या दृशति जैसे रूप केवल मूल अक्षर में प्रत्यय जोड़ने से सही नहीं हो जाते।

धातु और पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

गम् प्रथम

गच्छति

गच्छतः

गच्छन्ति

गम् मध्यम

गच्छसि

गच्छथः

गच्छथ

गम् उत्तम

गच्छामि

गच्छावः

गच्छामः

दृश् प्रथम

पश्यति

पश्यतः

पश्यन्ति

दृश् मध्यम

पश्यसि

पश्यथः

पश्यथ

दृश् उत्तम

पश्यामि

पश्यावः

पश्यामः

स्था प्रथम

तिष्ठति

तिष्ठतः

तिष्ठन्ति

स्था मध्यम

तिष्ठसि

तिष्ठथः

तिष्ठथ

स्था उत्तम

तिष्ठामि

तिष्ठावः

तिष्ठामः

भू का लट् आधार भव होता है—भवति, भवतः, भवन्ति; भवसि, भवथः, भवथ; भवामि, भवावः, भवामः। उदाहरण “वृक्षाः उद्याने तिष्ठन्ति” और “अहं चित्रं पश्यामि” में व्यक्ति और संख्या देखकर रूप चुनिए।

8. अस् और आत्मनेपद को अलग सीखिए

अस् का अर्थ होना है और इसके वर्तमान रूप विशेष हैं। नीचे सभी रूप दिए हैं; इसे भू की तरह असति बनाकर न चलाएँ।

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम

अस्ति

स्तः

सन्ति

मध्यम

असि

स्थः

स्थ

उत्तम

अस्मि

स्वः

स्मः

परस्मैपद और आत्मनेपद क्रिया-प्रत्ययों के अलग वर्ग हैं। उन्हें केवल काम दूसरे के लिए या अपने लिए जैसे सरल नियम से हर वाक्य में न तय करें; धातु का व्याकरणिक प्रयोग भी महत्त्वपूर्ण है। आत्मनेपदी लभ् के लट् रूप देखें।

पुरुष

एकवचन

द्विवचन

बहुवचन

प्रथम

लभते

लभेते

लभन्ते

मध्यम

लभसे

लभेथे

लभध्वे

उत्तम

लभे

लभावहे

लभामहे

“वयं ज्ञानं लभामहे” में उत्तम पुरुष बहुवचन है। इसका अर्थ काम केवल अपने लिए होने के कारण कोई भी परस्मैपदी धातु आत्मनेपदी कर देना नहीं। निर्धारित शब्दकोश या पाठ्य-सूची की धातु-पहचान अपनाएँ।

9. वाक्य-पूर्ति का पूरा तर्क लिखिए

“युवां विद्यालयं ___” में गम् और लट् हो तो युवाम् मध्यम पुरुष द्विवचन है। अतः रूप गच्छथः होगा। “ह्यः ते पुस्तकम् ___” में पठ् और लङ् हो तो ते प्रथम पुरुष बहुवचन है; रूप अपठन्। “श्वः आवां ___” में पठ् और लृट् के लिए पठिष्यावः होगा।

समय-शब्द, कर्ता और प्रश्न में दिए लकार को मिलाएँ। यदि प्रश्न स्वयं कोई लकार देता है तो उसे अनदेखा न करें। सर्वनाम का पुरुष तय करने के बाद संख्या चुनें, फिर धातु का वास्तविक आधार। यह क्रम गम्भीर त्रुटियों को रोकता है। उत्तर लिखने के बाद उसी पुरुष-वचन का कोई परिचित रूप याद करके तुलना करना उपयोगी है।

10. नकार, अव्यय और पूर्ण वाक्य जाँचिए

“न” सामान्य निषेध है—“सः न पठति।” रोकने के लिए “मा” का प्रयोग आता है; उच्चतर व्याकरण में उसके साथ विशेष रूप-नियम हैं। इस अध्याय के सामान्य रूप-अभ्यास को उन सभी नियमों का विकल्प न मानें। प्रश्न में दिया पूरा निषेधात्मक ढाँचा सुरक्षित रखें।

क्रिया और कर्ता दूर हों तब भी उनका मेल बना रहे। “अहं मित्रैः सह पठामि” में मित्रैः बहुवचन होने पर भी मुख्य कर्ता अहम् है। इसलिए पठामः नहीं आएगा। इसी प्रकार दो कर्ताओं को मिलाने पर संख्या बदल सकती है। सबसे पास की संज्ञा देखकर क्रिया चुनने के बजाय वाक्य की भूमिका समझना आवश्यक है।

प्रश्न हल करने की विधि

  1. धातु और परस्मैपद या आत्मनेपद वर्ग पहचानिए।

  2. प्रसंग या निर्देश से लकार तय कीजिए।

  3. कर्ता का पुरुष और वचन निर्धारित कीजिए।

  4. उस धातु का सही आधार और प्रत्यय चुनिए।

  5. हलन्त, दीर्घ स्वर तथा सन्धियुक्त रूप जाँचिए।

  6. पूरा वाक्य अर्थ सहित दोबारा पढ़िए।

सम्बन्ध

  • शब्दरूप कर्ता की संख्या तथा दूसरे पदों के सम्बन्ध बताते हैं।

  • अनुवाद में समय और आशय सही लकार चुनने का आधार देते हैं।

  • पठन में क्रिया पहचानने से पदच्छेद के बाद अन्वय सरल होता है।

सामान्य त्रुटियाँ

  • अहम् को संस्कृत प्रथम पुरुष कहना; यहाँ वह उत्तम पुरुष है।

  • गम् से गमति बनाना; लट् में आधार गच्छ है।

  • पठत् और पठत की तरह हलन्त का अन्तर मिटाना; रूप की पहचान बदल सकती है।

  • सह के साथ आए बहुवचन पद से क्रिया मिलाना; मुख्य कर्ता देखें।

पुनरावृत्ति सूची

  • मैं धातु, पुरुष, वचन और लकार अलग पहचान सकता/सकती हूँ।

  • मैं पठ् के पाँच प्रमुख लकारों के रूप लिख सकता/सकती हूँ।

  • मैं सामान्य धातुओं के वर्तमान आधार और रूप पहचान सकता/सकती हूँ।

  • मैं परस्मैपद और आत्मनेपद के प्रत्यय अलग कर सकता/सकती हूँ।

  • मैं वाक्य-पूर्ति में कर्ता और क्रिया का मेल जाँच सकता/सकती हूँ।

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