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7 MIN LESSON · SANSKRIT

Class 7 Sanskrit: Translation and Transformation: Complete Concepts and Practice

संस्कृत — हिन्दी-संस्कृत अनुवाद, कर्ता-कर्म और कारक, काल-वचन परिवर्तन, नकार, प्रश्न, अव्यय, समय-लेखन, सरल वाच्य-परिचय, वाक्य-संशोधन और घटनाक्रम।

परिचय

एक भाषा की बात दूसरी भाषा में उसी अर्थ के साथ कहना अनुवाद है। संस्कृत में शब्दों के अन्त और क्रिया का रूप बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। “हम जाते हैं” को “वयं गच्छामः” कहते हैं। यदि गच्छति लिख दें तो अर्थ समझ में आने पर भी पुरुष-वचन का मेल अशुद्ध रहेगा।

रूपान्तरण में किसी सही वाक्य का निर्दिष्ट भाग बदलते हैं, जैसे एक बालक की जगह दो बालक या आज की जगह आने वाला कल। बदलाव करते समय बाकी अर्थ सुरक्षित रखना जरूरी है। इस अध्याय में दैनिक विद्यालयी वाक्यों से अनुवाद, प्रश्न, समय और संशोधन का क्रमबद्ध अभ्यास है।

अधिगम उद्देश्य

  • पहचानें वाक्य का मुख्य अर्थ और कर्ता-क्रिया।

  • चुनें कारक के अनुसार नामपद का रूप।

  • बदलें काल और वचन बिना अनावश्यक अर्थ-परिवर्तन के।

  • बनाएँ नकार और प्रश्नवाचक वाक्य।

  • प्रयोग करें समय तथा सामान्य अव्ययों का।

  • सुधारें भाषा और घटनाक्रम की त्रुटियाँ।

मुख्य अवधारणाएँ

1. अर्थ को छोटे प्रश्नों में बाँटना

अनुवाद से पहले पूछें: कौन, क्या, कहाँ, कब और किससे? फिर उपयुक्त संस्कृत रूप चुनें। हिन्दी पदक्रम को अक्षरशः रखने की आवश्यकता नहीं, लेकिन अर्थ और व्याकरण सही होने चाहिए।

हिन्दी

संस्कृत

मुख्य पहचान

बालक खेलता है।

बालकः क्रीडति।

एक कर्ता

बालिका कहानी पढ़ती है।

बालिका कथां पठति।

कर्म द्वितीया

दो मित्र आते हैं।

मित्रे आगच्छतः।

नपुंसकलिङ्ग द्विवचन

हम विद्यालय जाते हैं।

वयं विद्यालयं गच्छामः।

उत्तम पुरुष बहुवचन

पेड़ पर पक्षी है।

वृक्षे पक्षी अस्ति।

स्थान सप्तमी

“मित्र” नपुंसकलिङ्ग है; इसलिए दो मित्रों का रूप मित्रे है। हिन्दी में मित्र शब्द से पुरुष का अनुमान लगाकर हर बार मित्रौ न बना दें। संस्कृत शब्द का अपना लिङ्ग देखें।

2. हिन्दी सम्बन्ध और संस्कृत विभक्ति

हिन्दी के परसर्ग मार्गदर्शन देते हैं, पर एक परसर्ग का हर बार एक ही संस्कृत रूप नहीं होता। ‘से’ साधन, साथ या स्रोत बता सकता है।

सम्बन्ध

उदाहरण

कारण

लेखनी से

लेखन्या लिखति।

साधन तृतीया

मित्र के साथ

मित्रेण सह गच्छति।

सह के साथ तृतीया

वृक्ष से

वृक्षात् पत्रं पतति।

अलगाव पञ्चमी

छात्र को

छात्राय पुस्तकं ददाति।

प्राप्तकर्ता चतुर्थी

बालक की

बालकस्य लेखनी।

सम्बन्ध षष्ठी

कक्षा में

कक्षायां पठति।

स्थान सप्तमी

हल: “मैं मित्र के साथ उद्यान जाता हूँ।” कर्ता अहम्, साथ का पद मित्रेण सह और गन्तव्य उद्यानम् है। उत्तर अहं मित्रेण सह उद्यानं गच्छामि। मित्रस्य सह में षष्ठी गलत होगी।

3. पुरुष और वचन बदलना

कर्ता बदलने पर क्रिया का पुरुष-वचन देखें। अहम्→पठामि, त्वम्→पठसि, सः/सा→पठति। दो कर्ताओं और अनेक कर्ताओं में भी अन्तर है।

एक

दो

अनेक

बालकः पठति।

बालकौ पठतः।

बालकाः पठन्ति।

त्वं गच्छसि।

युवां गच्छथः।

यूयं गच्छथ।

अहं लिखामि।

आवां लिखावः।

वयं लिखामः।

केवल कर्ता का वचन बदलने के निर्देश से कर्म अपने आप नहीं बदलता। “बालकः पुस्तकं पठति” का दो कर्ताओं वाला रूप बालकौ पुस्तकं पठतः हो सकता है। दोनों एक ही पुस्तक पढ़ सकते हैं। यदि निर्देश पूरे वाक्य के वस्तुओं सहित वचन-परिवर्तन का हो तो उसी के अनुसार लिखें।

4. काल और आदेश

काल या भाव

संस्कृत उदाहरण

हिन्दी

वर्तमान

अहं क्रीडामि।

मैं खेलता/खेलती हूँ।

भूत

ह्यः अहम् अक्रीडम्।

बीते कल मैं खेला/खेली।

भविष्य

श्वः अहं क्रीडिष्यामि।

आने वाले कल मैं खेलूँगा/खेलूँगी।

आदेश

हे मित्र! क्रीड।

मित्र, खेलो।

उपदेश

छात्रः पठेत्।

छात्र को पढ़ना चाहिए।

ह्यः और श्वः अलग हैं। “कल” अकेला हिन्दी में दोनों अर्थ दे सकता है; पूरा प्रसंग देखें। यदि संदर्भ स्पष्ट न हो तो भूत और भविष्य दोनों सम्भावनाएँ बताना, मन से एक घटना मान लेने से बेहतर है।

हल: “वह कल बीते दिन विद्यालय गया।” उत्तर सः ह्यः विद्यालयम् अगच्छत्। जाना गम् है; उसका भूतकाल परिचित रूप अगच्छत् है।

5. नकार और प्रश्न

सामान्य निषेध के लिए न उपयोगी है: सः न पठति — वह नहीं पढ़ता। प्रश्न में किम् पूरे वाक्य से पहले रख सकते हैं: किं सः पठति? — क्या वह पढ़ता है? यह हाँ या नहीं वाला प्रश्न है।

मूल वाक्य

प्रश्न

उत्तर का प्रकार

सः पठति।

किं सः पठति?

हाँ या नहीं

बालकः पठति।

कः पठति?

व्यक्ति

बालिका लिखति।

का लिखति?

स्त्रीलिङ्ग व्यक्ति

सः उद्याने क्रीडति।

सः कुत्र क्रीडति?

स्थान

सः प्रातः आगच्छति।

सः कदा आगच्छति?

समय

किं सः पठति? और सः किं पठति? अलग प्रश्न हो सकते हैं। पहले क्या वह पढ़ता है, दूसरे वह क्या पढ़ता है। केवल किम् देखकर हर बार एक ही हिन्दी वाक्य न बनाएँ।

6. अव्यय से वाक्यों को जोड़ना

अव्यय अपना रूप लिङ्ग-वचन से नहीं बदलते। अत्र यहाँ, तत्र वहाँ, अधुना अब, अद्य आज, शनैः धीरे, सहसा अचानक, अपि भी और च तथा के अर्थ देते हैं।

यदा…तदा समय का सम्बन्ध: यदा वर्षा भवति तदा वयं गृहे तिष्ठामः। जब वर्षा होती है तब हम घर में रहते हैं। यदि…तर्हि शर्त: यदि समयः अस्ति तर्हि पठामि। यदि समय है तो पढ़ता हूँ।

इन दोनों को बिना अर्थ देखे न मिलाएँ। यदा निश्चित समय-सम्बन्ध और यदि शर्त व्यक्त करता है। “रामः श्यामः च पठतः” में च दोनों कर्ताओं को जोड़ता है; दो व्यक्ति होने से पठतः है।

7. घड़ी का समय

पूरा घण्टा वादनम् के साथ लिखते हैं। समय पर कार्य होने का वाक्य बनाएँ तो प्रायः वादने आता है।

समय

समय का नाम

वाक्य में प्रयोग

7:00

सप्तवादनम्

सप्तवादने पठामि।

7:15

सपादसप्तवादनम्

सपादसप्तवादने गच्छामि।

7:30

सार्धसप्तवादनम्

सार्धसप्तवादने क्रीडामि।

7:45

पादोनाष्टवादनम्

पादोनाष्टवादने आगच्छामि।

8:00

अष्टवादनम्

अष्टवादने लिखामि।

सपाद सवा, सार्ध साढ़े और पादोन अगले घण्टे से पन्द्रह मिनट कम है। 7:45 में आठ से चौथाई कम है, इसलिए पादोनाष्टवादनम्। पादोनसप्तवादनम् 6:45 बताएगा, 7:45 नहीं।

8. पहले कार्य और उद्देश्य

पठित्वा पढ़कर, गत्वा जाकर, कृत्वा करके और आगत्य आकर पूर्वकार्य बताते हैं। पठितुम् पढ़ने के लिए और गन्तुम् जाने के लिए उद्देश्य बताते हैं।

अनुवाद: सः भोजनं कृत्वा विद्यालयं गच्छति — वह भोजन करके विद्यालय जाता है। पहले भोजन, बाद में जाना। सः पठितुं पुस्तकालयं गच्छति — वह पढ़ने के लिए पुस्तकालय जाता है। पढ़ना लक्ष्य है, पहले पूरा हो चुका कार्य नहीं।

इन रूपों का लिङ्ग-वचन नहीं बदलता। बालिका पठित्वा लिखति में भी पठित्वा वही रहता है। कथापूर्ति में ऐसा शब्द चुनें जो घटना का क्रम स्पष्ट करे।

9. वाच्य का सरल परिचय

कर्तृवाच्य में कार्य करने वाला प्रमुख व्याकरणिक आधार होता है: बालकः पुस्तकं पठति। कर्मवाच्य में पढ़ी जाने वाली वस्तु प्रथमा में आती है: बालकेन पुस्तकं पठ्यते। अर्थ वही घटना है, पर रचना बदलती है।

कर्तृवाच्य

कर्मवाच्य

बालिका कथां पठति।

बालिकया कथा पठ्यते।

छात्रः पुस्तकानि पठति।

छात्रेण पुस्तकानि पठ्यन्ते।

यहाँ बालिका/छात्र तृतीया में और कथा/पुस्तकानि प्रथमा में हैं। कर्मवाच्य में पठ्यन्ते का बहुवचन पुस्तकानि से मिलता है। भाववाच्य का सरल उदाहरण बालकः हसति→बालकेन हस्यते है; इसमें अकर्मक क्रिया का भाव प्रमुख है। आगे की कक्षाओं में इसके पूरे नियम पढ़े जाते हैं।

10. अशुद्धि-संशोधन

अशुद्ध वाक्य

शुद्ध रूप

कारण

अहं गच्छति।

अहं गच्छामि।

उत्तम पुरुष

बालकौ पठन्ति।

बालकौ पठतः।

द्विवचन

पुस्तकम् सन्ति।

पुस्तकम् अस्ति।

एकवचन

बालिका सुन्दरः अस्ति।

बालिका सुन्दरी अस्ति।

विशेषण स्त्रीलिङ्ग

ह्यः सः पठिष्यति।

ह्यः सः अपठत्।

सामान्य बीता प्रसंग

शुद्धि में मन से पूरा विषय न बदलें। अहं गच्छति को सः गच्छति बनाकर व्याकरण मिल सकता है, लेकिन मूल अर्थ मैं हो तो क्रिया सुधारना चाहिए। निर्देश में कौन-सा पद बदलना है, यह देखें।

11. घटनाक्रम और वापस अर्थ की जाँच

इन घटनाओं को क्रम में रखें: छात्र ने पुस्तक ली, छात्र पुस्तकालय गया, छात्र ने पुस्तक पढ़ी, छात्र ने सार लिखा। सामान्य क्रम पुस्तकालय जाना→पुस्तक लेना→पढ़ना→सार लिखना है। ततः फिर का सम्बन्ध स्पष्ट करता है।

संस्कृत उत्तर बनाने के बाद उसे वापस हिन्दी में समझें। यदि उद्देश्य पढ़ने के लिए था पर लौटे अर्थ में पढ़कर हो गया, तो प्रत्यय गलत चुना गया है। यदि मूल वाक्य दो व्यक्तियों का था और उत्तर अनेक का हो गया, तो वचन गलत है। यही छोटी जाँच कई त्रुटियाँ पकड़ती है।

प्रश्न हल करने की विधि

  1. मूल अर्थ को छोटे भागों में पहचानें।

  2. कर्ता का पुरुष-वचन और क्रिया का काल चुनें।

  3. कर्म तथा अन्य सम्बन्धों की विभक्ति लिखें।

  4. अव्यय, समय और प्रश्न का आशय जाँचें।

  5. वापस अर्थ पढ़कर मूल कथन से मिलाएँ।

सम्बन्ध

  • शब्दरूप विभक्ति और विशेषण-सामञ्जस्य का आधार हैं।

  • धातुरूप क्रिया का पुरुष, वचन और काल स्पष्ट करते हैं।

  • रचना में इन्हीं छोटे वाक्यों से पत्र और अनुच्छेद बनते हैं।

सामान्य त्रुटियाँ

  • हिन्दी से का हर बार एक रूप नहीं; साधन और स्रोत अलग हैं।

  • ह्यः और श्वः को एक न समझें।

  • पादोन के साथ अगला घण्टा लिखें।

  • पठित्वा और पठितुम् बदलने से घटनाक्रम बदल जाता है।

पुनरावृत्ति सूची

  • मैं छोटे दैनिक वाक्यों का अनुवाद कर सकता/सकती हूँ।

  • मैं काल और वचन बदल सकता/सकती हूँ।

  • मैं प्रश्नपद और नकार का सही प्रयोग कर सकता/सकती हूँ।

  • मैं घड़ी का समय लिख सकता/सकती हूँ।

  • मैं संशोधन के बाद अर्थ की जाँच कर सकता/सकती हूँ।

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