परिचय
संस्कृत में शब्द का अन्त बदलने से उसका वाक्य में काम बदल सकता है। बालकः बताता है कि बालक कार्य करता है; बालकम् किसी कार्य का कर्म हो सकता है; बालकेन का अर्थ बालक के द्वारा हो सकता है। इसलिए पूरा शब्द पढ़ना चाहिए, केवल उसके शुरुआती अक्षर नहीं।
“बालकः मित्राय पुस्तकं ददाति” में तीन नामपद हैं। किसने दिया, किसे दिया और क्या दिया — ये बातें रूपों से स्पष्ट हैं। इस अध्याय में रूपसारणी के साथ ऐसे प्रयोग दिए हैं, ताकि याद किया रूप नए वाक्य में भी सही चुना जा सके।
अधिगम उद्देश्य
पहचानें नामपद का आधार, लिङ्ग और वचन।
समझाएँ विभक्ति से व्यक्त मुख्य सम्बन्ध।
बनाएँ प्रमुख शब्दों के तीनों वचनों के पूरे रूप।
प्रयोग करें अहम्, त्वम् और उनके अन्य रूपों का।
मिलाएँ विशेषण को संज्ञा के लिङ्ग-वचन-विभक्ति से।
जाँचें रूप और अर्थ का सम्बन्ध पूरे वाक्य में।
मुख्य अवधारणाएँ
1. प्रातिपदिक और पद
प्रातिपदिक नाम का मूल आधार है। राम, लता और फल प्रातिपदिक हैं; विभक्ति लगने पर रामः, लताम् और फलेन जैसे पद बनते हैं। नामपद व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव का नाम दे सकता है।
मूल पहचानने के लिए हर शब्द से आखिरी अक्षर हटाना नियम नहीं है। नदी का आधार नदी ही है, नद नहीं। पढ़ते समय पहचानें कि सारणी किस अन्त वाले शब्द की है। अकारान्त राम और आकारान्त लता की विभक्तियाँ एक जैसी नहीं होंगी।
2. लिङ्ग और वचन
तीन लिङ्ग हैं: पुल्लिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग। शब्द का व्याकरणिक लिङ्ग हमेशा जीवित व्यक्ति के आधार पर नहीं होता। वृक्षः पुल्लिङ्ग, नदी स्त्रीलिङ्ग और पुस्तकम् नपुंसकलिङ्ग हैं। हिन्दी में पुस्तक स्त्रीलिङ्ग होने से संस्कृत में भी वही मानना गलत है।
तीन वचन हैं: एकवचन एक के लिए, द्विवचन दो के लिए और बहुवचन दो से अधिक के लिए।
लिङ्ग | एक | दो | अनेक |
|---|---|---|---|
पुल्लिङ्ग | बालकः | बालकौ | बालकाः |
स्त्रीलिङ्ग | बालिका | बालिके | बालिकाः |
नपुंसकलिङ्ग | पुस्तकम् | पुस्तके | पुस्तकानि |
दो बालकों को बालकाः कहना वचन के भेद को खो देता है। नामपद के साथ क्रिया भी देखें: बालकौ पठतः, बालकाः पठन्ति। दो पुस्तकों के रूप पुस्तके को हर बार स्थान की सप्तमी न मानें; वही रूप प्रथमा-द्वितीया द्विवचन भी है।
3. विभक्तियाँ और कारक
कारक क्रिया से अर्थगत सम्बन्ध और विभक्ति शब्द का व्याकरणिक रूप है। आरम्भ में सामान्य उपयोग सीखें, फिर वाक्य के अनुसार उनका अर्थ निश्चित करें।
विभक्ति | सामान्य प्रश्न या सम्बन्ध | उदाहरण |
|---|---|---|
प्रथमा | कौन कार्य करता है? | बालकः पठति। |
द्वितीया | किसे या क्या? | पुस्तकं पठति। |
तृतीया | किससे या किसके द्वारा? | लेखन्या लिखति। |
चतुर्थी | किसको दिया? | मित्राय पुस्तकं ददाति। |
पञ्चमी | कहाँ से अलग हुआ? | वृक्षात् पत्रं पतति। |
षष्ठी | किसका? | बालकस्य पुस्तकम्। |
सप्तमी | कहाँ या किसमें? | उद्याने वृक्षाः सन्ति। |
सम्बोधन | किसे पुकारा? | हे बालक! आगच्छ। |
षष्ठी सम्बन्ध बताती है; उसे प्रत्येक वाक्य में कार्य करने वाला कर्ता न मानें। “बालकस्य पुस्तकम् अस्ति” में पुस्तकम् प्रथमान्त नपुंसकलिङ्ग है। कारक और विभक्ति का सम्बन्ध उपयोगी है, पर एक ही अन्त के कई अर्थ हो सकते हैं।
4. राम के पूर्ण शब्दरूप
विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
प्रथमा | रामः | रामौ | रामाः |
द्वितीया | रामम् | रामौ | रामान् |
तृतीया | रामेण | रामाभ्याम् | रामैः |
चतुर्थी | रामाय | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
पञ्चमी | रामात् | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
षष्ठी | रामस्य | रामयोः | रामाणाम् |
सप्तमी | रामे | रामयोः | रामेषु |
सम्बोधन | हे राम | हे रामौ | हे रामाः |
बालक और छात्र इसी ढाँचे पर चलते हैं। उदाहरण: अहं छात्राय लेखनीं ददामि। छात्राय चतुर्थी एकवचन है। अहं छात्रैः सह क्रीडामि। छात्रैः तृतीया बहुवचन है और सह साथ का अर्थ देता है।
5. लता के पूर्ण शब्दरूप
विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
प्रथमा | लता | लते | लताः |
द्वितीया | लताम् | लते | लताः |
तृतीया | लतया | लताभ्याम् | लताभिः |
चतुर्थी | लतायै | लताभ्याम् | लताभ्यः |
पञ्चमी | लतायाः | लताभ्याम् | लताभ्यः |
षष्ठी | लतायाः | लतयोः | लतानाम् |
सप्तमी | लतायाम् | लतयोः | लतासु |
सम्बोधन | हे लते | हे लते | हे लताः |
बालिका और माला इस ढाँचे के परिचित शब्द हैं। बालिकायाः पुस्तकम् में षष्ठी और कक्षायां छात्राः सन्ति में सप्तमी है। “हे लते” का सम्बोधन और “लते” का द्विवचन रूप समान दिखाई दे सकता है; वाक्य से पहचानें।
6. फल के पूर्ण शब्दरूप
विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
प्रथमा | फलम् | फले | फलानि |
द्वितीया | फलम् | फले | फलानि |
तृतीया | फलेन | फलाभ्याम् | फलैः |
चतुर्थी | फलाय | फलाभ्याम् | फलेभ्यः |
पञ्चमी | फलात् | फलाभ्याम् | फलेभ्यः |
षष्ठी | फलस्य | फलयोः | फलानाम् |
सप्तमी | फले | फलयोः | फलेषु |
सम्बोधन | हे फल | हे फले | हे फलानि |
नपुंसकलिङ्ग की प्रथमा और द्वितीया समान होती हैं। फलम् पतति में फल कार्य का कर्ता है। बालकः फलम् खादति में फल कर्म है। अन्तिम म् देखकर दोनों वाक्यों में एक ही विभक्ति तय न करें। पुस्तक और पुष्प भी इसी प्रकार चलते हैं।
7. मुनि और नदी के रूप
विभक्ति | मुनि एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
प्रथमा | मुनिः | मुनी | मुनयः |
द्वितीया | मुनिम् | मुनी | मुनीन् |
तृतीया | मुनिना | मुनिभ्याम् | मुनिभिः |
चतुर्थी | मुनये | मुनिभ्याम् | मुनिभ्यः |
पञ्चमी | मुनेः | मुनिभ्याम् | मुनिभ्यः |
षष्ठी | मुनेः | मुन्योः | मुनीनाम् |
सप्तमी | मुनौ | मुन्योः | मुनिषु |
सम्बोधन | हे मुने | हे मुनी | हे मुनयः |
विभक्ति | नदी एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
प्रथमा | नदी | नद्यौ | नद्यः |
द्वितीया | नदीम् | नद्यौ | नदीः |
तृतीया | नद्या | नदीभ्याम् | नदीभिः |
चतुर्थी | नद्यै | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
पञ्चमी | नद्याः | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
षष्ठी | नद्याः | नद्योः | नदीनाम् |
सप्तमी | नद्याम् | नद्योः | नदीषु |
सम्बोधन | हे नदि | हे नद्यौ | हे नद्यः |
नदी को आकारान्त लता जैसा न बदलें। “नद्याम् नौका अस्ति” में नदी में नाव होने का अर्थ है। “नदीनां जलम्” में अनेक नदियों का जल है। नदीः द्वितीया बहुवचन है, नद्यः प्रथमा बहुवचन; दोनों का अन्त अलग पहचानें।
8. अस्मद् और युष्मद् सर्वनाम
सर्वनाम संज्ञा के स्थान पर आते हैं। अस्मद् से अहम्, आवाम्, वयम् और युष्मद् से त्वम्, युवाम्, यूयम् बनते हैं। इनके रूप राम की सारणी से नहीं बनाए जा सकते। यहाँ स्वतंत्र अभ्यास के लिए पूर्ण रूप दिए हैं; संक्षिप्त मे, ते आदि के प्रयोग के अपने नियम हैं।
विभक्ति | अस्मद् एक | अस्मद् द्वि | अस्मद् बहु |
|---|---|---|---|
प्रथमा | अहम् | आवाम् | वयम् |
द्वितीया | माम् | आवाम् | अस्मान् |
तृतीया | मया | आवाभ्याम् | अस्माभिः |
चतुर्थी | मह्यम् | आवाभ्याम् | अस्मभ्यम् |
पञ्चमी | मत् | आवाभ्याम् | अस्मत् |
षष्ठी | मम | आवयोः | अस्माकम् |
सप्तमी | मयि | आवयोः | अस्मासु |
विभक्ति | युष्मद् एक | युष्मद् द्वि | युष्मद् बहु |
|---|---|---|---|
प्रथमा | त्वम् | युवाम् | यूयम् |
द्वितीया | त्वाम् | युवाम् | युष्मान् |
तृतीया | त्वया | युवाभ्याम् | युष्माभिः |
चतुर्थी | तुभ्यम् | युवाभ्याम् | युष्मभ्यम् |
पञ्चमी | त्वत् | युवाभ्याम् | युष्मत् |
षष्ठी | तव | युवयोः | युष्माकम् |
सप्तमी | त्वयि | युवयोः | युष्मासु |
प्रयोग: एतत् मम पुस्तकम्। अहं तुभ्यं पुस्तकं ददामि। शिक्षकः अस्मान् पश्यति। पहले में सम्बन्ध, दूसरे में प्राप्तकर्ता और तीसरे में देखने का कर्म है। मम को हर स्थान पर मैं का अनुवाद मानना गलत है; प्रथमा में अहम् चाहिए।
9. विशेषण और संज्ञा का मेल
विशेषण विशेष्य की विशेषता बताता है और सामान्यतः उसके लिङ्ग, वचन तथा विभक्ति के अनुसार बदलता है।
विशेष्य | उपयुक्त विशेषण सहित प्रयोग |
|---|---|
बालकः | सुन्दरः बालकः |
बालिका | सुन्दरी बालिका |
पुस्तकम् | सुन्दरं पुस्तकम् |
पुस्तकानि | सुन्दराणि पुस्तकानि |
पुष्पैः | सुन्दरैः पुष्पैः |
हिन्दी में सुन्दर का रूप अक्सर नहीं बदलता, इसलिए संस्कृत में भी हर बार सुन्दरः लिखने की आदत न डालें। विशेषण को केवल पास के शब्द से नहीं, जिस संज्ञा की विशेषता है उससे मिलाएँ। “अहं सुन्दरं पुस्तकं पश्यामि” में अहम् नहीं, पुस्तकम् उसका विशेष्य है।
10. रूप की जाँच का समेकित अभ्यास
वाक्य: बालिका मित्राय सुन्दरं पुष्पं ददाति। बालिका प्रथमा एकवचन कर्ता है, मित्राय चतुर्थी एकवचन प्राप्तकर्ता और पुष्पम् द्वितीया एकवचन कर्म। सुन्दरम् उसी पुष्प से मिलता है।
अब प्राप्तकर्ता दो मित्र हों तो बालिका मित्राभ्यां सुन्दरं पुष्पं ददाति। देने वाली अभी एक ही बालिका है, इसलिए ददाति नहीं बदलता। केवल एक पद का वचन बदलने पर सभी पदों को बिना कारण बहुवचन न करें।
प्रश्न हल करने की विधि
आधार और लिङ्ग पहचानें।
संख्या से वचन निश्चित करें।
वाक्य में सम्बन्ध से विभक्ति चुनें।
सारणी से सही रूप लिखें।
विशेषण और क्रिया का मेल जाँचें।
सम्बन्ध
धातुरूप कर्ता के वचन के अनुसार क्रिया चुनने में सहायता देते हैं।
अनुवाद में हिन्दी के सम्बन्ध को सही विभक्ति में रखना आवश्यक है।
पठन में समान रूपों का अर्थ पूरे वाक्य से खुलता है।
सामान्य त्रुटियाँ
पुस्तक को हिन्दी के आधार पर स्त्रीलिङ्ग न मानें; संस्कृत में पुस्तकम् नपुंसकलिङ्ग है।
दो व्यक्तियों के लिए बहुवचन के स्थान पर द्विवचन चुनें।
मम और अहम् अलग विभक्तियों के रूप हैं।
कर्म का वचन बदलने से कर्ता की क्रिया अपने आप नहीं बदलती।
पुनरावृत्ति सूची
मैं तीन लिङ्ग और तीन वचन पहचान सकता/सकती हूँ।
मैं मुख्य शब्दों की पूरी रूपसारणी बना सकता/सकती हूँ।
मैं कारक के अनुसार विभक्ति चुन सकता/सकती हूँ।
मैं सर्वनाम का सही रूप लगा सकता/सकती हूँ।
मैं विशेषण और संज्ञा का मेल जाँच सकता/सकती हूँ।