Skip to content
5 MIN LESSON · SANSKRIT

Class 12 Sanskrit: Translation and Transformation: Complete Concepts and Practice

संस्कृत — हिन्दी से संस्कृत अनुवाद के नियम, वाच्य-परिवर्तन (कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य) के चरण, क्त प्रत्यय से भूतकाल, समय-लेखन (सपाद, सार्ध, पादोन, अधिक, ऊन), प्रमुख अव्ययों का प्रयोग और संख्यावाचक शब्द, हल उदाहरणों सहित।

परिचय

संस्कृत सीखने का सबसे व्यावहारिक कौशल है अनुवाद: हिन्दी वाक्य को शुद्ध संस्कृत में बदलना। इसके लिए विभक्ति, धातुरूप और लकार, तीनों का सही प्रयोग आवश्यक है। साथ ही, परीक्षा में वाच्य-परिवर्तन, समय-लेखन और अव्ययों से रिक्त-स्थान पूर्ति भी पूछी जाती है।

इस अध्याय में इन सभी "रूपान्तरण" कौशलों की चरणबद्ध विधि दी गई है।

अधिगम उद्देश्य

  • हिन्दी वाक्यों का शुद्ध संस्कृत अनुवाद करना।

  • कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य में भेद करना और वाच्य बदलना।

  • क्त प्रत्यय से भूतकाल के वाक्य बनाना।

  • घड़ी का समय संस्कृत में लिखना।

  • प्रमुख अव्ययों का सही प्रयोग करना।

मुख्य अवधारणाएँ

1. अनुवाद के नियम

  1. कर्ता पहचानें और उसे प्रथमा में रखें (कर्तृवाच्य में)।

  2. कर्म (जिस पर क्रिया का फल पड़े) को द्वितीया में रखें।

  3. अन्य कारक: साधन → तृतीया, जिसके लिए → चतुर्थी, जिससे अलग → पञ्चमी, का/के/की → षष्ठी, में/पर → सप्तमी।

  4. काल देखकर लकार चुनें: वर्तमान → लट्, भविष्यत् → लृट्, भूत → लङ्, आज्ञा → लोट्, चाहिए → विधिलिङ्।

  5. क्रिया का पुरुष और वचन कर्ता के अनुसार रखें।

हल उदाहरण:

हिन्दी

संस्कृत

बालक विद्यालय जाता है।

बालकः विद्यालयं गच्छति।

हम सब कल दिल्ली जाएँगे।

वयं श्वः दिल्लीनगरं गमिष्यामः।

राम ने बाण से रावण को मारा।

रामः बाणेन रावणम् अहन्।

माता पुत्र के लिए भोजन बनाती है।

माता पुत्राय भोजनं पचति।

पेड़ से पत्ते गिरते हैं।

वृक्षात् पत्राणि पतन्ति।

तुम्हें प्रतिदिन पढ़ना चाहिए।

त्वं प्रतिदिनं पठेः।

गाँव के चारों ओर खेत हैं।

ग्रामं परितः क्षेत्राणि सन्ति।

आप कहाँ रहते हैं?

भवान् कुत्र वसति?

2. वाच्य-परिवर्तन

वाक्य में क्रिया किसके अनुसार है, इसे वाच्य कहते हैं।

वाच्य

किसकी प्रधानता

कर्ता

कर्म

क्रिया

कर्तृवाच्य

कर्ता

प्रथमा

द्वितीया

कर्ता के अनुसार

कर्मवाच्य (सकर्मक धातु)

कर्म

तृतीया

प्रथमा

कर्म के अनुसार, आत्मनेपद, धातु + य

भाववाच्य (अकर्मक धातु)

भाव (क्रिया)

तृतीया

नहीं होता

सदा प्रथम पुरुष, एकवचन, आत्मनेपद, धातु + य

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य:

  1. कर्ता को प्रथमा से तृतीया में बदलें।

  2. कर्म को द्वितीया से प्रथमा में बदलें।

  3. धातु में "य" जोड़ें और आत्मनेपद के प्रत्यय लगाएँ; पुरुष और वचन कर्म के अनुसार।

कर्तृवाच्य

कर्मवाच्य

रामः पुस्तकं पठति।

रामेण पुस्तकं पठ्यते।

अहं फलं खादामि।

मया फलं खाद्यते।

बालकाः ग्रन्थान् पठन्ति।

बालकैः ग्रन्थाः पठ्यन्ते।

सीता पत्रं लिखति।

सीतया पत्रं लिख्यते।

त्वं माम् पश्यसि।

त्वया अहं दृश्ये।

अन्तिम उदाहरण में कर्म "अहम्" (उत्तम पुरुष) है, इसलिए क्रिया "दृश्ये" (उत्तम पुरुष, एकवचन) है।

कर्तृवाच्य से भाववाच्य (अकर्मक धातुएँ: हस्, स्था, शी, भू, धाव्, नृत्):

कर्तृवाच्य

भाववाच्य

सः हसति।

तेन हस्यते।

बालकाः धावन्ति।

बालकैः धाव्यते।

अहं शये।

मया शय्यते।

वयं तिष्ठामः।

अस्माभिः स्थीयते।

भाववाच्य में क्रिया हमेशा प्रथम पुरुष, एकवचन में रहती है, चाहे कर्ता बहुवचन हो।

3. क्त प्रत्यय से भूतकाल

भूतकाल के लिए लङ् लकार के अतिरिक्त क्त और क्तवतु प्रत्यय भी प्रयोग होते हैं।

  • क्तवतु (कर्तृवाच्य): कर्ता प्रथमा, कृदन्त कर्ता के लिङ्ग-वचन अनुसार: रामः पुस्तकं पठितवान्। सीता पुस्तकं पठितवती।

  • क्त (कर्मवाच्य): कर्ता तृतीया, कर्म प्रथमा, कृदन्त कर्म के अनुसार: रामेण पुस्तकं पठितम्। मया कथा श्रुता।

  • क्त (अकर्मक, कर्तृवाच्य): सः गृहं गतः। बालिका गता।

4. समय-लेखन

घड़ी का समय लिखने के लिए संख्या के साथ "वादनम्" जोड़ा जाता है।

समय

संस्कृत

नियम

5:00

पञ्चवादनम्

पूरा घण्टा

5:15

सपाद-पञ्चवादनम्

सपाद = सवा (+15 मिनट)

5:30

सार्ध-पञ्चवादनम्

सार्ध = साढ़े (+30 मिनट)

5:45

पादोन-षड्वादनम्

पादोन = पौने (अगले घण्टे से 15 मिनट कम)

5:10

दशाधिक-पञ्चवादनम्

अधिक = बजकर इतने मिनट

5:50

दशोन-षड्वादनम्

ऊन = इतने मिनट कम

संख्याएँ (1–12): एक, द्वि, त्रि, चतुर्, पञ्च, षट्, सप्त, अष्ट, नव, दश, एकादश, द्वादश। उदाहरण: 1:00 एकवादनम्, 2:00 द्विवादनम्, 6:00 षड्वादनम्, 8:00 अष्टवादनम्, 12:00 द्वादशवादनम्।

5. प्रमुख अव्यय

अव्यय वे शब्द हैं जिनका रूप लिङ्ग, विभक्ति और वचन से नहीं बदलता।

अव्यय

अर्थ

उदाहरण

अद्य / श्वः / ह्यः

आज / आने वाला कल / बीता कल

अद्य अवकाशः अस्ति।

अत्र / तत्र / कुत्र / सर्वत्र

यहाँ / वहाँ / कहाँ / सब जगह

सः तत्र गच्छति।

यदा … तदा

जब … तब

यदा वर्षा भवति तदा मयूराः नृत्यन्ति।

यत्र … तत्र

जहाँ … वहाँ

यत्र धूमः तत्र वह्निः।

यथा … तथा

जैसे … वैसे

यथा राजा तथा प्रजा।

यदि … तर्हि

यदि … तो

यदि परिश्रमं करिष्यसि तर्हि सफलः भविष्यसि।

अधुना / सम्प्रति

अब

अधुना अहं पठामि।

पुरा

प्राचीन काल में

पुरा एकः राजा आसीत्।

सहसा

अचानक

सहसा वृष्टिः अभवत्।

शनैः / उच्चैः / नीचैः

धीरे / ज़ोर से / धीमे

कच्छपः शनैः चलति।

इतस्ततः

इधर-उधर

बालकाः इतस्ततः धावन्ति।

अपि / च / एव

भी / और / ही

अहम् अपि गमिष्यामि।

वृथा

व्यर्थ

वृथा कालं मा नय।

मा

मत (निषेध)

असत्यं मा वद।

प्रश्न हल करने की विधि

  1. अनुवाद: कर्ता, कर्म, अन्य कारक और काल पहचानें, फिर विभक्ति और लकार लगाएँ।

  2. कर्मवाच्य: कर्ता → तृतीया, कर्म → प्रथमा, धातु + य + आत्मनेपद, कर्म के अनुसार।

  3. भाववाच्य: कर्ता → तृतीया, क्रिया प्रथम पुरुष एकवचन।

  4. समय: 15 मिनट → सपाद, 30 → सार्ध, 45 → पादोन (अगला घण्टा)।

सम्बन्ध

  • शब्दरूप और विभक्ति अनुवाद का आधार हैं।

  • धातुरूप और लकार से क्रिया का सही रूप मिलता है।

  • प्रत्यय (क्त, क्तवतु) से भूतकाल के सरल वाक्य बनते हैं।

सामान्य त्रुटियाँ

  • कर्मवाच्य में क्रिया को कर्ता के अनुसार रखना। क्रिया कर्म के अनुसार होती है।

  • भाववाच्य में बहुवचन क्रिया लगाना, जैसे "बालकैः धाव्यन्ते"। सही रूप "धाव्यते" है।

  • 5:45 को "पादोन-पञ्चवादनम्" लिखना। पादोन अगले घण्टे के साथ लगता है: पादोन-षड्वादनम्।

  • "मा" के साथ लट् लकार लगाना, जैसे "मा वदसि"। सही रूप "मा वद" है।

पुनरावृत्ति सूची

  • मैं हिन्दी वाक्यों का शुद्ध संस्कृत अनुवाद कर सकता/सकती हूँ।

  • मैं कर्मवाच्य और भाववाच्य में परिवर्तन कर सकता/सकती हूँ।

  • मैं क्त और क्तवतु से भूतकाल के वाक्य बना सकता/सकती हूँ।

  • मैं घड़ी का समय संस्कृत में लिख सकता/सकती हूँ।

  • मैं प्रमुख अव्ययों का प्रयोग कर सकता/सकती हूँ।

Practise this topic →

Discussion

Sign in to join the discussion.

Sign in

No comments yet. Be the first to share your thoughts.