परिचय
अपठित गद्यांश वह गद्य होता है जिसे विद्यार्थी ने पहले पाठ के रूप में नहीं पढ़ा होता। इसमें सफलता याद की हुई जानकारी से अधिक ध्यानपूर्वक पढ़ने, विचारों के सम्बन्ध समझने और प्रमाण के आधार पर उत्तर देने पर निर्भर करती है। प्रश्न किसी सूचना, कारण, निष्कर्ष, शब्दार्थ या लेखक के उद्देश्य पर आधारित हो सकता है।
मान लीजिए किसी विद्यालय ने पानी बचाने का अभियान चलाया। केवल यह जानना पर्याप्त नहीं कि बच्चों ने पोस्टर बनाए। यह भी समझना होगा कि समस्या क्या थी, उपाय कैसे चुना गया और परिणाम के बारे में लेखक ने क्या सीमाएँ बताईं। इस अध्याय में एक मौलिक गद्यांश के माध्यम से पढ़ने और उत्तर लिखने की पूरी प्रक्रिया समझाई गई है।
अधिगम उद्देश्य
गद्यांश का विषय, केंद्रीय विचार और उपयुक्त शीर्षक पहचानना।
स्पष्ट सूचना और प्रमाण-आधारित अनुमान में अन्तर करना।
कारण, परिणाम, विरोध और उदाहरण के सम्बन्ध समझाना।
प्रसंग के अनुसार शब्दार्थ तथा सर्वनाम का संकेत निर्धारित करना।
तथ्य, मत और सुझाव को अलग करना।
संक्षिप्त, शुद्ध और प्रश्नानुकूल उत्तर लिखना।
मुख्य अवधारणाएँ
1. पहले समग्र आशय समझिए
पहली बार पढ़ते समय हर कठिन शब्द पर रुकने के बजाय पूरे अनुच्छेद का सामान्य अर्थ समझिए। पूछिए कि लेखक किस समस्या, घटना या विचार की चर्चा कर रहा है। दूसरी बार प्रश्न पढ़कर सम्बन्धित अंश खोजिए। तीसरी बार उस अंश के आगे-पीछे की पंक्तियाँ पढ़िए ताकि अधूरी सूचना के आधार पर उत्तर न चुना जाए।
उदाहरण के लिए, किसी लेख में पुस्तकालय, खेल का मैदान और विज्ञान कक्ष का उल्लेख हो सकता है, पर उसका केंद्रीय विचार विद्यालय में साझी जिम्मेदारी हो सकता है। केवल बार-बार दिखाई देने वाले स्थान का नाम विषय का पूरा अर्थ नहीं बताता। आरम्भ, बीच के उदाहरण और निष्कर्ष को जोड़कर समग्र आशय निर्धारित करना चाहिए।
2. मौलिक अभ्यास गद्यांश: जिम्मेदारी की छोटी शुरुआत
नगर के एक माध्यमिक विद्यालय में दोपहर के बाद पीने के पानी के पास फर्श अक्सर भीगा रहता था। कुछ बच्चों ने समझा कि छोटे विद्यार्थी जानबूझकर पानी गिराते हैं। पर्यावरण समूह ने तुरन्त आरोप लगाने के बजाय कुछ दिनों तक स्थिति देखने का निर्णय लिया। सदस्यों ने पाया कि एक नल ठीक से बन्द नहीं होता था और बोतल भरते समय पानी के छींटे रोकने के लिए कोई उचित व्यवस्था भी नहीं थी।
समूह ने अपनी टिप्पणियाँ शिक्षक को दीं। अगले दिन नल की मरम्मत कराई गई और बोतल रखने के लिए एक छोटी जाली लगाई गई। साथ ही बच्चों ने पास में एक सादा संदेश लिखा—“जरूरत भर पानी लें और नल बन्द करके देखें।” संदेश किसी को दोष देने के लिए नहीं, एक साझा आदत विकसित करने के लिए था।
कुछ दिनों बाद फर्श पहले की तुलना में अधिक सूखा दिखाई देने लगा। समूह ने इसे केवल अपने संदेश की सफलता नहीं बताया। मरम्मत, जाली और बच्चों की सावधानी, तीनों का योगदान हो सकता था। वर्षा वाले दिनों में जूतों से आया पानी भी फर्श गीला करता था, इसलिए हर गीले निशान को नल की खराबी नहीं माना जा सकता था।
बैठक में एक छात्रा ने कहा कि जिम्मेदारी का अर्थ केवल दूसरों को नियम याद दिलाना नहीं है। समस्या को ध्यान से समझना, अपने अनुमान की जाँच करना और उचित व्यक्ति तक सूचना पहुँचाना भी जिम्मेदारी है। समूह ने तय किया कि वह दूसरे स्थानों पर भी पहले कारण समझेगा, फिर उपाय सुझाएगा। अभियान का सबसे उपयोगी परिणाम शायद सूखा फर्श नहीं, बिना जल्दबाजी किए मिलकर सोचना था।
यह गद्यांश इसी पाठ के लिए लिखा गया है। आगे के उत्तर इसी की जानकारी पर आधारित हैं; किसी बाहरी अभियान या वास्तविक विद्यालय के आँकड़े इसमें मानकर नहीं जोड़ने चाहिए।
3. प्रत्यक्ष सूचना को ठीक रूप में पहचानिए
प्रत्यक्ष सूचना वह बात है जो गद्यांश में स्पष्ट कही गई हो। प्रश्न “कौन-सी दो भौतिक व्यवस्थाएँ की गईं?” का उत्तर है—नल की मरम्मत कराई गई और बोतल रखने की जाली लगाई गई। केवल “बच्चों को समझाया गया” लिखना अधूरा होगा क्योंकि प्रश्न व्यवस्था के दो ठोस बदलाव पूछता है।
उत्तर में सीमित करने वाले शब्दों पर ध्यान दीजिए। “कुछ बच्चों ने समझा” का अर्थ सभी बच्चों की सहमति नहीं है। “पहले की तुलना में अधिक सूखा” का अर्थ हमेशा पूरी तरह सूखा नहीं है। ऐसे शब्द हटाने से कथन का दायरा बदल जाता है। बहुविकल्पीय प्रश्न में सही लगने वाला विकल्प भी गलत हो सकता है यदि वह “कुछ” को “सभी” या “संभव” को “निश्चित” बना दे।
4. अनुमान को कल्पना से अलग रखिए
अनुमान स्पष्ट सूचनाओं से निकाला गया उचित निष्कर्ष है। बच्चों ने आरोप लगाने से पहले निरीक्षण किया, इसलिए यह अनुमान उचित है कि वे प्रमाण के आधार पर समस्या समझना चाहते थे। पर यह कहना कि उन्हें पहले किसी अधिकारी ने दण्ड दिया था, मनगढ़न्त बात होगी; ऐसा प्रसंग गद्यांश में नहीं है।
उत्तर का प्रकार | उदाहरण | आधार |
|---|---|---|
स्पष्ट सूचना | एक नल ठीक से बन्द नहीं होता था | सीधे लिखा है |
उचित अनुमान | समूह जल्दबाजी में दोष तय नहीं करना चाहता था | निरीक्षण और सामूहिक चर्चा से समर्थित |
आधारहीन कल्पना | छोटे बच्चों ने जानबूझकर नल तोड़ा था | ऐसा कोई प्रमाण नहीं |
अच्छा अनुमान उत्तर और प्रमाण को जोड़ता है। नमूना उत्तर: “समूह ने सावधानी दिखाई, क्योंकि उसने दोष लगाने से पहले नल और आसपास की व्यवस्था का निरीक्षण किया।” इस वाक्य में गुण का नाम और उसका कारण दोनों उपस्थित हैं।
5. केंद्रीय विचार, विषय और शीर्षक में अन्तर समझिए
विषय चर्चा का क्षेत्र है, जैसे पानी की बचत। केंद्रीय विचार उस विषय पर विकसित मुख्य बात है, जैसे समस्या का समाधान अनुमान और आरोप के बजाय निरीक्षण तथा साझी जिम्मेदारी से करना चाहिए। शीर्षक कम शब्दों में पूरे गद्यांश की दिशा व्यक्त करता है।
“एक नल” शीर्षक बहुत संकीर्ण है, क्योंकि गद्यांश का अन्त सोचने की आदत पर होता है। “जिम्मेदारी की छोटी शुरुआत” समस्या और सीख दोनों को समेटता है। शीर्षक चुनते समय पूछिए कि क्या वह आरम्भ से निष्कर्ष तक लागू होता है। केवल किसी आकर्षक शब्द के कारण ऐसा शीर्षक न चुनें जिसका मुख्य विचार से सम्बन्ध न हो। शीर्षक संक्षिप्त होना चाहिए, पर इतना अस्पष्ट भी नहीं कि किसी भी लेख पर लगाया जा सके।
6. कारण, परिणाम और घटनाक्रम पहचानिए
घटनाक्रम बताता है कि पहले क्या हुआ और बाद में क्या हुआ। कारण-परिणाम सम्बन्ध बताता है कि कोई घटना क्यों हुई। पहले निरीक्षण हुआ, फिर मरम्मत; यह क्रम है। नल ठीक से बन्द नहीं होता था, इसलिए पानी गिरता था; यह कारण का सम्बन्ध है। दोनों को एक समझने से उत्तर कमजोर हो जाता है।
इस गद्यांश में मरम्मत, जाली और सावधानी साथ-साथ बदलीं। इसलिए पूरा सुधार केवल संदेश के कारण हुआ, यह कहना उचित नहीं। नमूना उत्तर: “समूह ने संदेश को अकेला कारण नहीं माना, क्योंकि उसी समय नल की मरम्मत और जाली की व्यवस्था भी हुई थी।” यह उत्तर सुधार को नकारता नहीं; केवल कारण बताने में सावधानी रखता है।
7. प्रसंगानुकूल शब्दार्थ और संकेत खोजिए
प्रसंगानुकूल अर्थ वही होता है जो दिए गए वाक्य में उपयुक्त बैठे। “साझा आदत” में “साझा” का अर्थ मिलकर अपनाई गई आदत है, किसी सम्पत्ति में कानूनी हिस्सेदारी नहीं। “टिप्पणियाँ” यहाँ निरीक्षण से लिखी गई बातें हैं, केवल व्यंग्य या आलोचना नहीं। शब्द का सामान्य अर्थ जानने के बाद उसे मूल वाक्य में रखकर जाँचिए।
सर्वनाम के संकेत के लिए सम्बन्धित संज्ञा खोजिए। “समूह ने इसे केवल अपने संदेश की सफलता नहीं बताया” में “इसे” फर्श के अधिक सूखे होने की स्थिति की ओर संकेत करता है। निकटतम शब्द को यन्त्रवत् उत्तर न बनाइए। पूरा वाक्य और पिछले वाक्य का अर्थ मिलाकर देखें। विपरीतार्थक शब्द पूछे जाने पर भी सही प्रसंग चुनिए; “सूखा फर्श” के लिए “गीला” उचित है, “उदास” नहीं।
8. तथ्य, मत और सुझाव अलग कीजिए
तथ्य ऐसा कथन है जिसकी जाँच की जा सकती है। मत किसी का विचार या मूल्यांकन है। सुझाव आगे किए जाने वाले काम की अनुशंसा है। नल की मरम्मत हुई—यह वर्णित तथ्य है। बिना जल्दबाजी मिलकर सोचना सबसे उपयोगी परिणाम था—यह लेखक का मूल्यांकन है। पहले कारण समझना चाहिए—यह व्यवहार का सुझाव भी है।
एक कथन की भूमिका उसके सन्दर्भ से तय होती है। किसी छात्रा का मत बताया जाना यह सिद्ध करता है कि उसने ऐसा विचार व्यक्त किया; इससे हर परिस्थिति में उसकी बात अपने-आप प्रमाणित नहीं हो जाती। उत्तर लिखते समय “लेखक के अनुसार” और “गद्यांश से स्पष्ट है” जैसे संकेतों का उचित उपयोग करें, पर उन्हें बिना आवश्यकता हर पंक्ति में न दोहराएँ।
9. व्याख्यात्मक और कथन-कारण प्रश्न हल कीजिए
“क्यों” पूछे जाने पर कारण दीजिए, “कैसे” पूछे जाने पर प्रक्रिया या सम्बन्ध बताइए। “जिम्मेदारी का व्यापक अर्थ कैसे सामने आता है?” का उत्तर केवल “नल ठीक हुआ” नहीं होगा। लिखिए: “बच्चों ने निरीक्षण किया, अपने अनुमान की जाँच की और शिक्षक तक सूचना पहुँचाई; इससे जिम्मेदारी आदेश देने के बजाय समस्या समझने और सहयोग करने का काम बनती है।”
कथन-कारण प्रश्न में पहले दोनों वाक्यों की सत्यता अलग-अलग जाँचिए, फिर उनका सम्बन्ध। कथन हो कि हर गीला निशान नल की खराबी नहीं बताता और कारण हो कि वर्षा में जूतों से भी पानी आता है—दोनों सही हैं और कारण कथन की व्याख्या करता है। दो सही वाक्य हमेशा एक-दूसरे की व्याख्या नहीं करते; उनका तार्किक सम्बन्ध भी आवश्यक है।
10. सार और छोटे उत्तर लिखने का अभ्यास कीजिए
सार मुख्य विचार और आवश्यक घटनाओं को कम शब्दों में प्रस्तुत करता है। उदाहरण: “विद्यालय के पर्यावरण समूह ने भीगे फर्श के लिए बच्चों को दोष देने से पहले निरीक्षण किया। नल की मरम्मत, जाली और सावधानी के बाद स्थिति सुधरी। समूह ने सीखा कि जिम्मेदारी में कारण की जाँच और सहयोग भी शामिल हैं।” इसमें छोटे विवरण हटे हैं, पर मूल विचार सुरक्षित है।
लघु उत्तर में प्रश्न का सीधा उत्तर पहले लिखें, फिर आवश्यक प्रमाण दें। पूरा अनुच्छेद न उतारें और अपनी राय न जोड़ें जब तक पूछा न गया हो। भाषा सरल, वाक्य पूरे और वर्तनी शुद्ध रखें। शब्द-सीमा कम हो तो दोहराव हटाएँ, आवश्यक कारण नहीं। अन्त में जाँचें कि प्रश्न ने जितने बिन्दु माँगे थे, उतने उत्तर में हैं।
प्रश्न हल करने की विधि
पूरे गद्यांश का विषय और विचार-प्रवाह समझिए।
प्रश्न में सूचना, कारण, अनुमान, शब्दार्थ या शीर्षक की माँग पहचानिए।
सम्बन्धित पंक्ति और उसके आसपास का प्रसंग दोबारा पढ़िए।
विकल्पों में अतिशयोक्ति, विरोध और बाहरी जानकारी हटाइए।
अपने शब्दों में सीधा उत्तर लिखकर आवश्यक प्रमाण जोड़िए।
शब्द-सीमा, वर्तनी और कथन के दायरे की जाँच कीजिए।
सम्बन्ध
व्याकरण से सर्वनाम, वाक्य-सम्बन्ध और शब्दार्थ समझने में सहायता मिलती है।
विज्ञान का निरीक्षण और निष्कर्ष निकालने का तरीका प्रमाण-आधारित पठन से जुड़ता है।
अनुच्छेद लेखन में केंद्रीय विचार और सहायक बिन्दुओं का यही संगठन उपयोगी होता है।
सामान्य त्रुटियाँ
कुछ बच्चों की धारणा को सभी का मत मान लेना; सीमित करने वाले शब्द सुरक्षित रखें।
सुधार का पूरा श्रेय संदेश को देना; साथ हुए भौतिक बदलाव भी देखें।
शीर्षक में केवल नल का उल्लेख करना; पूरे गद्यांश के विचार को समेटें।
उत्तर में मनगढ़न्त दण्ड या दोष जोड़ना; केवल उपलब्ध प्रमाण पर भरोसा करें।
पुनरावृत्ति सूची
मैं विषय, केंद्रीय विचार और उपयुक्त शीर्षक में अन्तर कर सकता/सकती हूँ।
मैं स्पष्ट सूचना और उचित अनुमान अलग कर सकता/सकती हूँ।
मैं कारण, परिणाम और कथन के दायरे की पहचान कर सकता/सकती हूँ।
मैं प्रसंगानुकूल शब्दार्थ और सर्वनाम का संकेत बता सकता/सकती हूँ।
मैं संक्षिप्त सार और प्रमाणयुक्त उत्तर लिख सकता/सकती हूँ।