परिचय
व्यावहारिक लेखन किसी वास्तविक आवश्यकता के लिए किया जाता है—अनुरोध करना, सूचना देना, शिकायत पहुँचाना या किसी को आवश्यक कार्य समझाना। इसकी गुणवत्ता कठिन शब्दों की संख्या से नहीं, इस बात से तय होती है कि पाठक सही जानकारी समझकर उचित कदम उठा सकता है या नहीं। अधूरी तिथि वाला सुन्दर सूचना-पत्र अपने उद्देश्य में असफल हो सकता है।
विद्यालय में पुस्तकालय का समय बदलने की सूचना और मित्र को भेजा संदेश एक जैसे नहीं लिखे जाते। दोनों में उद्देश्य, पाठक और अपेक्षित भाषा अलग होती है। यहाँ पत्र, सूचना, संदेश, ईमेल तथा विज्ञापन के सामान्य कौशल दिए गए हैं। अपनी परीक्षा में निर्धारित प्रारूप और शब्द-सीमा को प्राथमिकता दें; सभी प्रारूप हर हिंदी पाठ्यक्रम में एक साथ अनिवार्य नहीं होते।
अधिगम उद्देश्य
लेखन से पहले उद्देश्य, पाठक और आवश्यक बिन्दु निर्धारित करना।
औपचारिक तथा अनौपचारिक पत्र का उपयुक्त प्रारूप अपनाना।
स्पष्ट सूचना, संदेश और ईमेल तैयार करना।
विज्ञापन में तथ्य, आकर्षण और जिम्मेदारी का संतुलन रखना।
विनम्र, संक्षिप्त और प्रसंगानुकूल भाषा चुनना।
प्रारूप, विषयवस्तु, संगठन और भाषा के आधार पर लेखन जाँचना।
मुख्य अवधारणाएँ
1. प्रश्न को काम की सूची में बदलिए
पहले चार बातें लिखिए—कौन लिख रहा है, किसे लिख रहा है, क्यों लिख रहा है और कौन-सी जानकारी अनिवार्य है। उदाहरण के लिए पुस्तकालय में अतिरिक्त समय माँगने वाले पत्र में कक्षा, आवश्यकता, प्रस्तावित समय और अनुमति का अनुरोध चाहिए। केवल “पुस्तकें बहुत उपयोगी हैं” लिखते रहना कार्य पूरा नहीं करता।
प्रश्न में दी गई तिथि, स्थान, भूमिका और शर्त न बदलें। जहाँ विवरण गढ़ने की अनुमति हो, वहीं आवश्यक और सम्भव जानकारी जोड़ें। वास्तविक सम्पर्क संख्या या किसी व्यक्ति का निजी पता अनावश्यक रूप से न लिखें। शब्द-सीमा में पहले जरूरी तथ्य सुरक्षित रखें, फिर सजावटी या दोहराए वाक्य हटाएँ।
2. औपचारिक पत्र की संरचना समझिए
औपचारिक पत्र संस्था, अधिकारी या अपरिचित व्यक्ति को उसके पद के अनुसार लिखा जाता है। सामान्य क्रम है—प्रेषक का पता, दिनांक, प्राप्तकर्ता का पद और पता, विषय, सम्बोधन, मुख्य भाग, समापन तथा नाम। विषय संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट हो: “पुस्तकालय के समय में वृद्धि हेतु अनुरोध” अस्पष्ट “एक जरूरी बात” से बेहतर है।
मुख्य भाग में पहले उद्देश्य, फिर कारण और विवरण, अन्त में स्पष्ट अनुरोध दें। शिकायत में देखी गई समस्या बताएँ, मनगढ़न्त आरोप नहीं। “आप कभी काम नहीं करते” के बजाय “पिछले कुछ दिनों से प्रवेश-द्वार के पास कचरा एकत्र है” अधिक उपयोगी और शिष्ट है। औपचारिकता का अर्थ अत्यधिक चापलूसी या जटिल वाक्य नहीं है।
3. पूरा मौलिक औपचारिक पत्र
प्रश्न: विद्यालय के पुस्तकालय में परीक्षा की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय माँगिए।
18, सरिता नगर
भोपाल
12 अगस्त 2026
प्रधानाचार्य महोदय
सरिता माध्यमिक विद्यालय
भोपाल
विषय: पुस्तकालय के समय में वृद्धि हेतु अनुरोध
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारी कक्षा के अनेक विद्यार्थी आगामी मूल्यांकन की तैयारी के लिए पुस्तकालय की सन्दर्भ पुस्तकों का उपयोग करना चाहते हैं। वर्तमान समय में पुस्तकालय दोपहर के अवकाश के दौरान खुलता है, जिससे भोजन और पुस्तक-चयन दोनों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
यदि विद्यालय की व्यवस्था अनुकूल हो तो सप्ताह में दो दिन कक्षाओं के बाद पुस्तकालय एक अतिरिक्त घंटे के लिए खोला जा सकता है। विद्यार्थी निर्धारित नियमों का पालन करेंगे और अनुमति-पत्र के साथ ही रुकेंगे। हम पुस्तकाध्यक्ष की सुविधा के अनुसार पंजीकरण करने को भी तैयार हैं।
कृपया इस प्रस्ताव पर विचार करके उचित व्यवस्था की अनुमति दें।
धन्यवाद।
भवदीया
नैना जोशी
कक्षा 9 की प्रतिनिधि
इस नमूने में आवश्यकता और व्यवहार्य सुझाव दोनों हैं। अतिरिक्त समय को पहले से स्वीकृत नहीं माना गया है। परीक्षा में अपना उत्तर दी गई भूमिका और शब्द-सीमा के अनुसार छोटा या विस्तृत करें।
4. अनौपचारिक पत्र में आत्मीयता और क्रम रखें
अनौपचारिक पत्र परिवार या मित्र को लिखा जाता है। प्रेषक का पता, दिनांक, आत्मीय सम्बोधन, व्यवस्थित मुख्य भाग और सम्बन्धानुकूल समापन दें। भाषा सहज हो, पर अशुद्ध या अनावश्यक रूप से असावधान नहीं। निजी पत्र में भी उद्देश्य स्पष्ट रहे।
पूरा मौलिक नमूना
18, सरिता नगर, भोपाल
14 अगस्त 2026
प्रिय अन्वी,
पिछले पत्र में तुमने पूछा था कि हमारी पठन-मण्डली कैसे काम करती है। हम हर सप्ताह अपनी पसन्द की पुस्तक से कोई छोटा अंश पढ़ते हैं और बताते हैं कि वह हमें क्यों अच्छा लगा। किसी को कठिन शब्द समझ न आए तो दूसरा साथी सहायता करता है।
अब हम पुरानी पुस्तकों की मरम्मत का छोटा कार्यक्रम भी कर रहे हैं। तुम्हें चित्र-पुस्तकें पसन्द हैं, इसलिए अगली छुट्टी में आओ तो अपनी पसन्द की एक पुस्तक साथ लाना। हम दोनों मिलकर छोटे बच्चों के लिए कहानी चुनेंगे।
घर में सबको मेरा नमस्कार कहना। तुम्हारे उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी।
तुम्हारी सखी
नैना
यह पत्र अनुभव साझा करता है और मिलने का स्पष्ट सुझाव देता है। इसमें सरकारी आवेदन जैसी भाषा या विषय-पंक्ति जोड़ने की जरूरत नहीं है, जब तक कोई विशेष निर्देश न हो।
5. सूचना को कार्ययोग्य बनाइए
सूचना किसी समूह तक संक्षिप्त आधिकारिक जानकारी पहुँचाती है। संस्था का नाम, सूचना, जारी करने की तिथि, विषय या शीर्षक, मुख्य विवरण और जारीकर्ता का नाम-पद लिखें। हस्तलिखित परीक्षा में निर्देशानुसार सीमा-रेखा या पेटी का उपयोग किया जा सकता है।
पूरा मौलिक नमूना
सरिता माध्यमिक विद्यालय, भोपाल
सूचना
16 अगस्त 2026
पुस्तक-मरम्मत कार्यशाला
कक्षा 9 के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए 22 अगस्त को दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक पुस्तकालय में पुस्तक-मरम्मत कार्यशाला होगी। प्रतिभागी 20 अगस्त तक पुस्तकाध्यक्ष के पास नाम दर्ज कराएँ। एक क्षतिग्रस्त पुस्तक और पेंसिल लाएँ। मरम्मत की अन्य सामग्री विद्यालय देगा।
नैना जोशी
पठन-मण्डली सचिव
जाँचिए कि क्या, कब, कहाँ, किसके लिए और कैसे भाग लेना है—इनका उत्तर मिलता है। कार्यक्रम की तिथि और पंजीकरण की अन्तिम तिथि अलग हैं। दोनों को मिलाना पाठक को गलत कार्रवाई की ओर ले जा सकता है।
6. संदेश में मूल सूचना सुरक्षित रखिए
संदेश अनुपस्थित व्यक्ति तक किसी बातचीत या परिस्थिति की जरूरी बात पहुँचाता है। प्राप्तकर्ता, तिथि-समय जहाँ आवश्यक हो, सूचना, अपेक्षित काम और संदेश लिखने वाले का नाम दें। पूरी बातचीत उतारना आवश्यक नहीं।
पूरा मौलिक नमूना
संदेश
18 अगस्त 2026, शाम 4 बजे
अन्वी,
पुस्तकाध्यक्ष का फोन आया था। कल की पठन-मण्डली बैठक पुस्तकालय के बजाय कक्ष 6 में होगी। समय दोपहर 1 बजे ही रहेगा। उन्होंने मरम्मत योग्य पुस्तकों की सूची लाने और अन्य सदस्यों को स्थान-परिवर्तन बताने के लिए कहा है।
नैना
यहाँ स्थान बदला है, समय नहीं। “समय भी बदल गया” जोड़ना गलत होगा। संदेश में अपनी राय को फोन करने वाले के निर्देश की तरह न लिखें। यदि कोई जानकारी नहीं दी गई हो, तो उसे निश्चित तथ्य बनाकर न जोड़ें।
7. ईमेल में विषय और अनुरोध स्पष्ट रखें
ईमेल में प्राप्तकर्ता, विषय, सम्बोधन, संक्षिप्त मुख्य भाग और नाम पर्याप्त जानकारी देते हैं। वास्तविक परीक्षा में यदि पूरा पता दिया हो तो ठीक लिखें; अभ्यास में भूमिका-आधारित प्राप्तकर्ता भी उपयोगी है।
पूरा मौलिक नमूना
प्राप्तकर्ता: पुस्तकाध्यक्ष
विषय: कार्यशाला के लिए पुस्तकालय की मेज उपयोग करने की अनुमति
महोदया,
पठन-मण्डली 22 अगस्त को पुस्तक-मरम्मत कार्यशाला आयोजित करना चाहती है। क्या हमें दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक पुस्तकालय की बड़ी मेज उपयोग करने की अनुमति मिल सकती है? शिक्षक की देखरेख में विद्यार्थी काम करेंगे।
हम मेज को ढककर काम करेंगे और कार्यक्रम के बाद स्थान साफ करेंगे। कृपया प्रस्तावित समय की सुविधा तथा आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया बता दें।
धन्यवाद।
नैना जोशी
पठन-मण्डली सचिव
ईमेल छोटा हो सकता है, पर रूखा नहीं। “कमरा दे दीजिए” की तुलना में निश्चित समय और जिम्मेदारी बताने वाला अनुरोध अधिक उपयोगी है। अनावश्यक संक्षेप और भावचिह्न औपचारिक ईमेल में न भरें।
8. विज्ञापन में आकर्षण के साथ सत्यता रखें
विज्ञापन किसी वस्तु, सेवा या कार्यक्रम की ओर ध्यान खींचता है। स्पष्ट शीर्षक, प्रमुख विशेषता, आवश्यक विवरण और उचित सम्पर्क या कार्रवाई शामिल करें। कम शब्दों में प्रभावी प्रस्तुति उपयोगी है, पर झूठे दावे नहीं।
पूरा मौलिक नमूना
पढ़ी हुई पुस्तक, नई यात्रा!
सामुदायिक पुस्तक-विनिमय
अपनी साफ और उपयोग योग्य पुस्तक लाएँ, सूची में दर्ज दूसरी पुस्तक चुनें।
स्थान: सरिता सामुदायिक कक्ष
दिनांक: 24 अगस्त 2026
समय: सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक
आयोजन समिति से कार्यक्रम-स्थल पर जानकारी लें।
“हर पुस्तक बिल्कुल नई” कहना गलत होता यदि कार्यक्रम पुरानी उपयोग योग्य पुस्तकों का है। विज्ञापन का उद्देश्य पाठक को भ्रमित करना नहीं। निजी सम्पर्क विवरण जोड़ने के बजाय प्रश्न में दिया सुरक्षित सम्पर्क अपनाएँ।
9. भाषा, प्रारूप और मूल्यांकन की जाँच करें
मूल्यांकन में प्रायः विषयवस्तु, संगठन, प्रारूप और भाषा देखी जाती है; अंक-विभाजन सार्वभौमिक नहीं। प्रत्येक प्रारूप के लिए अपने प्रश्नपत्र का निर्देश देखें। शुद्ध वर्तनी, सही काल, विनम्र सम्बोधन और तथ्यपूर्ण मुख्य भाग हर रूप में उपयोगी हैं।
“जल्दी आना” की जगह “दोपहर 1 बजे पहुँचें” कार्ययोग्य है। “वह चीज ठीक करें” की जगह “पुस्तकालय के दरवाजे की टूटी कुंडी ठीक करें” स्पष्ट है। यदि सीमा से अधिक लिखा हो तो प्रशंसा और दोहराव काटें, स्थान या अन्तिम तिथि नहीं। अन्त में पाठक बनकर पूछें—मुझे क्या करना है और कब करना है? यदि इसका उत्तर नहीं मिलता, लेखन अभी अधूरा है।
प्रश्न हल करने की विधि
भूमिका, पाठक, उद्देश्य, शब्द-सीमा और सभी अनिवार्य बिन्दु चिन्हित करें।
उपयुक्त प्रारूप चुनकर जानकारी का क्रम बनाएँ।
सीधे उद्देश्य से आरम्भ करके आवश्यक विवरण दें।
अनुरोध, कार्रवाई या समापन स्पष्ट लिखें।
सभी तिथियाँ, स्थान और दिए तथ्य मूल प्रश्न से मिलाएँ।
भाषा, शिष्टता, प्रारूप और शब्द-सीमा की अन्तिम जाँच करें।
सम्बन्ध
वाक्य-व्याकरण से विनम्र अनुरोध और स्पष्ट निर्देश बनते हैं।
अपठित पठन आवश्यक सूचना चुनने और सही संदेश देने में सहायता करता है।
रचनात्मक लेखन की भाषा-सजगता विज्ञापन और आत्मीय पत्र को प्रभावी बनाती है।
सामान्य त्रुटियाँ
सूचना में पत्र जैसा लम्बा सम्बोधन जोड़ना; समूह-घोषणा का प्रारूप अपनाएँ।
संदेश में अपरिवर्तित समय बदल देना; मूल विवरण सुरक्षित रखें।
विषय को केवल जरूरी बात लिखना; अनुरोध या समस्या का नाम बताएँ।
शब्द-सीमा घटाने के लिए स्थान और अन्तिम तिथि हटाना; पहले दोहराव काटें।
पुनरावृत्ति सूची
मैं उद्देश्य और पाठक के अनुसार प्रारूप चुन सकता/सकती हूँ।
मैं औपचारिक और अनौपचारिक पत्र लिख सकता/सकती हूँ।
मैं पूरी जानकारी वाली सूचना, संदेश और ईमेल बना सकता/सकती हूँ।
मैं विज्ञापन में आकर्षक लेकिन सत्य विवरण दे सकता/सकती हूँ।
मैं विषयवस्तु, प्रारूप, भाषा और कार्रवाई की स्पष्टता जाँच सकता/सकती हूँ।