परिचय
व्यावहारिक लेखन किसी वास्तविक काम के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से हम सूचना देते हैं, अनुमति माँगते हैं, निमन्त्रण भेजते हैं, शिकायत रखते हैं या आवश्यक सन्देश पहुँचाते हैं। सफलता का आधार केवल सुन्दर भाषा नहीं, बल्कि सही विवरण और पाठक के लिए स्पष्ट अगला कदम है।
विद्यालय के पुस्तकालय का समय बदल जाए तो सूचना में नया समय लिखना जरूरी है। केवल यह कहना कि समय बदल गया, उपयोगी नहीं होगा। इसी तरह अवकाश के लिए पत्र में कारण और तिथियाँ स्पष्ट होनी चाहिए। इस पाठ के नमूने मौलिक हैं; परीक्षा में उन्हीं की नकल करने के बजाय प्रश्न की परिस्थिति के अनुसार विवरण बदलें।
अधिगम उद्देश्य
पाठक, उद्देश्य और आवश्यक सूचना की पहचान करना।
औपचारिक तथा अनौपचारिक पत्र का उचित प्रारूप अपनाना।
सूचना, सन्देश, ईमेल, निमन्त्रण और उत्तर तैयार करना।
विज्ञापन तथा संवाद में आवश्यक तथ्य और उपयुक्त भाषा चुनना।
शब्द-सीमा, शिष्टता, क्रम और स्पष्टता बनाए रखना।
विषयवस्तु, प्रारूप और भाषा की मूल्यांकन-कसौटी लागू करना।
मुख्य अवधारणाएँ
1. लिखने से पहले परिस्थिति समझना
सबसे पहले पूछें कि कौन लिख रहा है, किसे लिख रहा है और पाठक से क्या अपेक्षा है। प्रधानाचार्य को लिखा अनुरोध और मित्र को भेजा सन्देश एक जैसे नहीं होंगे। दोनों में तथ्य सही हों, लेकिन सम्बोधन, विस्तार और भाषा अलग हो सकती है।
जहाँ लागू हो, छह बातें नोट करें: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों और कैसे। किसी कार्यशाला की सूचना में आयोजन का नाम, पात्र विद्यार्थी, तिथि, समय, स्थान और नाम देने की विधि आवश्यक हो सकती है। प्रश्न में न दी गई फीस, अधिकारी की स्वीकृति या पुरस्कार की घोषणा अपनी ओर से न जोड़ें। कल्पना की अनुमति हो तो विवरण यथार्थपूर्ण और परस्पर संगत रखें।
2. औपचारिक पत्र का प्रारूप
औपचारिक पत्र संस्था, अधिकारी या ऐसे व्यक्ति को लिखा जाता है जिससे व्यवहारिक सम्बन्ध हो। सामान्य प्रारूप में प्रेषक का पता, तिथि, प्राप्तकर्ता का पद-पता, विषय, सम्बोधन, मुख्य भाग, विनम्र समापन और नाम आते हैं। विद्यालय के स्वीकृत प्रारूप में छोटे अन्तर हों तो उसका पालन करें।
मुख्य भाग तीन चरणों में रखें: लिखने का उद्देश्य, आवश्यक तथ्य और अपेक्षित कार्य। विषय संक्षिप्त हो। “पुस्तकालय में अतिरिक्त अध्ययन-समय का अनुरोध” स्पष्ट है; केवल “प्रार्थना-पत्र” लिखने से विशिष्ट उद्देश्य नहीं खुलता।
पूर्ण मौलिक नमूना
१८, विकास नगर
भोपाल
६ अगस्त २०२६
प्रधानाचार्य महोदय
सरस्वती माध्यमिक विद्यालय
भोपाल
विषय: पुस्तकालय में अतिरिक्त अध्ययन-समय का अनुरोध
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारी कक्षा के कुछ विद्यार्थी सामूहिक विज्ञान-परियोजना के लिए पुस्तकालय की सन्दर्भ-पुस्तकें उपयोग करना चाहते हैं। नियमित अवकाश में सामग्री खोजने और आवश्यक टिप्पणियाँ बनाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
कृपया सप्ताह में एक दिन अंतिम कालांश के बाद अतिरिक्त अध्ययन-समय देने पर विचार करें। यदि व्यवस्था सम्भव हो, तो हम पुस्तकालयाध्यक्ष के निर्देशों का पालन करते हुए निर्धारित समूह में बैठेंगे और समय पर पुस्तकें वापस रखेंगे।
कृपया उपयुक्त दिन तथा आवश्यक नियम बताने की कृपा करें।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी विद्यार्थी
नमन शर्मा
कक्षा आठ, अनुभाग ब
पत्र अनुमति माँगता है; यह दावा नहीं करता कि अनुमति पहले ही मिल चुकी है। समस्या और व्यावहारिक सुझाव दोनों हैं। अप्रमाणित आरोप तथा आदेशात्मक भाषा से बचा गया है।
3. आवेदन और शिकायत की भाषा
अवकाश-आवेदन में कारण, आरम्भ और समाप्ति की तिथि तथा छूटे काम की पूर्ति की बात उपयोगी है। निजी स्वास्थ्य का अनावश्यक विस्तार न दें। “चिकित्सकीय सलाह के कारण दो दिन का अवकाश आवश्यक है” पर्याप्त हो सकता है, यदि प्रश्न यही परिस्थिति देता है।
शिकायत में स्थान, समस्या, देखे गए तथ्य और अपेक्षित सुधार लिखें। “खेल मैदान के पास नल से पानी लगातार टपक रहा है” विशिष्ट सूचना है। “यहाँ कोई कभी काम नहीं करता” अतिरंजित आरोप है। विनम्र भाषा समस्या को कमजोर नहीं करती; तथ्यपूर्ण शिकायत अधिक प्रभावी होती है।
लघु नमूना शिकायत-अनुच्छेद: “विद्यालय के पूर्वी बरामदे का नल ठीक से बन्द नहीं हो रहा है। अवकाश के बाद भी उससे पानी बहता रहता है। कृपया उसकी जाँच और मरम्मत कराने की व्यवस्था करें, ताकि पानी की अनावश्यक बर्बादी रुके तथा फर्श फिसलन भरा न रहे।” इसे पूर्ण पत्र में उचित प्रारूप के साथ रखा जाएगा।
4. अनौपचारिक पत्र
अनौपचारिक पत्र मित्र या परिवार के परिचित सदस्य को लिखा जाता है। इसमें आत्मीयता, स्वाभाविक भाषा और निजी अनुभव हो सकते हैं। सामान्यतः पता, तिथि, आत्मीय सम्बोधन, विषयानुकूल अनुच्छेद और स्नेहपूर्ण समापन दिया जाता है।
पूर्ण मौलिक नमूना
१८, विकास नगर
भोपाल
८ अगस्त २०२६
प्रिय सखी रिया,
तुम्हारा पत्र मिला। तुमने हमारे नए पठन-समूह के बारे में पूछा था। पिछले सप्ताह हमने ऐसी पुस्तकों की सूची बनाई जिन्हें छोटे बच्चे आसानी से पढ़ सकें। केवल आवरण देखकर स्तर तय करना कठिन था, इसलिए पुस्तकालयाध्यक्ष ने हमें कुछ पृष्ठ पढ़कर भाषा समझने को कहा।
मुझे सबसे अच्छा लगा कि समूह में हर विद्यार्थी ने अलग सुझाव दिया। हमने चित्रों वाले संकेत भी बनाए, ताकि बच्चे अपनी पसन्द की पुस्तक खोज सकें। अगली बैठक में कहानियों पर छोटी चर्चा होगी।
जब तुम यहाँ आओगी, तो तुम्हें भी पुस्तकालय दिखाऊँगी। तुमने हाल में कौन-सी पुस्तक पढ़ी है? उसके बारे में अवश्य लिखना।
तुम्हारी सखी
अनिका
पत्र पहले पत्र का उत्तर देता है, अनुभव साझा करता है और बातचीत आगे बढ़ाता है। इसमें सरकारी आवेदन की शैली थोपने की आवश्यकता नहीं। आत्मीयता का अर्थ अशुद्ध वर्तनी या अस्पष्ट कथन भी नहीं है।
5. सूचना-लेखन
सूचना किसी समूह को संक्षेप में आवश्यक जानकारी देती है। सामान्य प्रारूप है: संस्था का नाम, सूचना, जारी करने की तिथि, शीर्षक, मुख्य विवरण और जारीकर्ता का नाम-पद। हाथ से लिखते समय विद्यालय कहे तो बॉक्स बनाएँ; बॉक्स की सजावट से अधिक तथ्य महत्त्वपूर्ण हैं।
पूर्ण मौलिक सूचना
सरस्वती माध्यमिक विद्यालय, भोपाल
सूचना
१० अगस्त २०२६
पुस्तक-संरक्षण कार्यशाला
कक्षा सात और आठ के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए १६ अगस्त को दोपहर एक से दो बजे तक पुस्तकालय में पुस्तक-संरक्षण कार्यशाला होगी। प्रतिभागी एक पुरानी कॉपी और साफ कपड़ा लाएँ। अपने नाम १४ अगस्त तक पुस्तकालयाध्यक्ष को दें।
अनिका वर्मा
पठन-समूह सचिव
जारी करने की तिथि, आयोजन की तिथि और नाम देने की अंतिम तिथि अलग हैं। इन्हें मिलाने से पाठक गलत दिन पहुँच सकता है। सूचना में पत्र वाला सम्बोधन और आपका आज्ञाकारी लिखना सामान्यतः आवश्यक नहीं।
6. सन्देश और बातचीत से सूचना चुनना
सन्देश अनुपस्थित व्यक्ति तक जरूरी बात पहुँचाता है। नाम, तिथि/समय जहाँ अपेक्षित हो, मुख्य सूचना, निर्देश और लिखने वाले का नाम रखें। बातचीत के सारे अभिवादन दोहराने की जरूरत नहीं।
पूर्ण मौलिक सन्देश
आरव,
१२ अगस्त, शाम चार बजे
तुम्हारी अनुपस्थिति में खेल-प्रशिक्षक का फोन आया था। कल का अभ्यास भीगे मैदान के बजाय सभागार में होगा। शुरू होने का समय नहीं बदला है। साफ जूते लाना और अपने अभ्यास-साथी को भी स्थान-परिवर्तन बता देना।
सिया
यहाँ समय न बदलने की सूचना को किसी नए समय में नहीं बदला गया। यदि फोन करने वाले ने समय नहीं बताया, तो अपनी ओर से समय बनाना गलत होगा। कल जैसे शब्द का अर्थ स्पष्ट रखने के लिए सन्देश की तिथि लिखना उपयोगी है।
7. ईमेल का प्रारूप और शिष्टता
ईमेल में प्राप्तकर्ता का पता, विषय, सम्बोधन, मुख्य भाग और समापन आता है। सामान्यतः डाक-पते की जरूरत नहीं होती, जब तक प्रश्न विशेष रूप से न कहे। विषय उपयोगी हो और मुख्य भाग में अनुरोध स्पष्ट हो।
पूर्ण मौलिक ईमेल
प्राप्तकर्ता: पुस्तकालयाध्यक्ष
विषय: परियोजना के लिए सन्दर्भ-पुस्तकों का अनुरोध
आदरणीय महोदय,
हमारी कक्षा का समूह स्थानीय पक्षियों पर परियोजना बना रहा है। कृपया इस विषय की दो उपयुक्त सन्दर्भ-पुस्तकें सुझाने की कृपा करें। हम कल के मध्याह्न अवकाश में पुस्तकालय आकर उन्हें पढ़ना चाहते हैं।
यदि उस समय सुविधा न हो, तो कृपया कोई अन्य उपयुक्त समय बता दें। हम पुस्तकालय के नियमों का पालन करेंगे।
सादर
अदिति सेन
कक्षा आठ
यहाँ वास्तविक पता नहीं दिया गया है; परीक्षा में प्रश्न में दिया ईमेल-पता लिखें। भेजने से पहले प्राप्तकर्ता, विषय और संलग्नक का उल्लेख—यदि हो—जाँचें। केवल नमस्ते विषय लिखने से अनुरोध का सार नहीं मिलता।
8. निमन्त्रण और उत्तर
निमन्त्रण में अवसर, आमन्त्रित व्यक्ति, तिथि, समय, स्थान और उत्तर देने की व्यवस्था बताएं। औपचारिक तथा पारिवारिक निमन्त्रण की भाषा अलग हो सकती है। उत्तर में स्वीकार या अस्वीकार स्पष्ट होना चाहिए; केवल पत्र मिला लिखना पर्याप्त नहीं।
पूर्ण मौलिक निमन्त्रण
प्रिय रिया,
हमारे मोहल्ले में १८ अगस्त को शाम चार से पाँच बजे तक सामुदायिक भवन में कहानी-पाठ होगा। तुम्हें सादर आमन्त्रित करती हूँ। अपनी पसन्द की छोटी कहानी साथ लाना। कृपया १६ अगस्त तक बताना कि तुम आ सकोगी या नहीं।
स्नेह सहित
अनिका
पूर्ण मौलिक स्वीकृति
प्रिय अनिका,
कहानी-पाठ के निमन्त्रण के लिए धन्यवाद। मैं १८ अगस्त को सामुदायिक भवन में उपस्थित रहूँगी और एक छोटी कहानी साथ लाऊँगी। सबके साथ पढ़ने का अवसर मिलने की खुशी है।
तुम्हारी सखी
रिया
अस्वीकृति में आभार और संक्षिप्त उचित कारण दें। निश्चित उत्तर माँगा गया हो तो शायद आऊँगी कहकर भ्रम न छोड़ें।
9. विज्ञापन और संक्षिप्त घोषणाएँ
विज्ञापन किसी वस्तु, सेवा या आयोजन की ओर ध्यान आकर्षित करता है। शीर्षक, मुख्य विशेषताएँ, उपयोगी विवरण और सम्पर्क/कार्य-विधि रखें। मौलिकता अच्छी है, लेकिन झूठे दावे, अप्रमाणित सर्वोत्तम या निश्चित परिणाम का वादा उचित नहीं।
पूर्ण मौलिक विज्ञापन
पुस्तक-विनिमय मेला
पढ़ी हुई उपयोगी पुस्तकें लाएँ, नई कहानियाँ घर ले जाएँ!
२० अगस्त, सुबह दस से बारह बजे
सामुदायिक भवन, विकास नगर
साफ और पूरी पुस्तकें ही स्वीकार होंगी। प्रत्येक पुस्तक पर अपना नाम-पर्चा लगाएँ। विस्तृत नियम के लिए आयोजन मेज पर सम्पर्क करें।
संक्षिप्त घोषणा पहली बार सुनने पर समझ आनी चाहिए। सबसे जरूरी निर्देश पहले रखें: “कार्यशाला के प्रतिभागी मध्याह्न अवकाश के बाद पुस्तकालय में एकत्र हों।” लम्बी भूमिका के बाद स्थान बताने से श्रोता मुख्य सूचना खो सकता है।
10. संवाद-लेखन और निर्देश
संवाद में अलग वक्ताओं की बात स्वाभाविक क्रम में आती है। हर उत्तर पिछले कथन से जुड़े और विषय आगे बढ़ाए। केवल अभिवादन से पूरा उत्तर न भरें।
पूर्ण मौलिक लघु संवाद
अदिति: क्या परियोजना की दोनों पुस्तकें हमें घर ले जाने की अनुमति है?
पुस्तकालयाध्यक्ष: एक पुस्तक जारी हो सकती है, दूसरी सन्दर्भ-पुस्तक है। उसे यहीं पढ़ना होगा।
अदिति: क्या हम अवकाश में बैठकर टिप्पणियाँ बना सकते हैं?
पुस्तकालयाध्यक्ष: हाँ, लेकिन पुस्तक में निशान न लगाएँ और समय समाप्त होने पर उसे निर्धारित स्थान पर रखें।
अदिति: धन्यवाद। हम अलग कॉपी में टिप्पणियाँ लिखेंगे।
निर्देश में क्रम और स्पष्ट क्रिया रखें: पहले पुस्तक का क्रमांक लिखें, फिर प्रविष्टि दिखाएँ, अन्त में वापसी की तिथि नोट करें। केवल जरूरी काम कर लेना अस्पष्ट निर्देश है। सुरक्षा या अनुमति का नियम हो तो उसे न छोड़ें।
11. मूल्यांकन और संशोधन की कसौटी
सामान्य मूल्यांकन में विषयवस्तु, प्रारूप, क्रम, उपयुक्त भाषा और शुद्धता देखी जाती है। निश्चित अंक-विभाजन विद्यालय तथा परीक्षा पर निर्भर है। किसी एक नमूने की शब्द-सीमा को सभी पत्रों पर लागू न करें; प्रश्न की सीमा मानें।
अन्त में नाम, तिथि, समय और स्थान मिलाएँ। जाँचें कि विषय मुख्य भाग से मेल खाता है और अपेक्षित कार्य स्पष्ट है। दोहराव हटाकर संक्षिप्त करें, आवश्यक तथ्य काटकर नहीं। बहुत सारे विस्मयादिबोधक चिह्न या अलंकारिक विशेषण उपयोगिता नहीं बढ़ाते। स्पष्ट, सम्मानपूर्ण और तथ्यपूर्ण लेखन ही लक्ष्य है।
प्रश्न हल करने की विधि
रूप, पाठक और उद्देश्य पहचानें।
प्रश्न से आवश्यक विवरण अलग नोट करें।
उचित प्रारूप का ढाँचा बनाएँ।
तथ्य क्रम से रखते हुए संक्षिप्त मुख्य भाग लिखें।
पाठक का अगला कदम स्पष्ट करें।
भाषा, तिथियाँ, प्रारूप और शब्द-सीमा की जाँच करें।
सम्बन्ध
अपठित गद्य से जरूरी सूचना चुनने का कौशल सन्देश और सूचना लिखने में काम आता है।
वाक्य-व्याकरण से निर्देश, अनुरोध और काल का सही प्रयोग सम्भव होता है।
शब्द-ज्ञान से औपचारिक और आत्मीय भाषा का उचित चयन किया जा सकता है।
सामान्य त्रुटियाँ
सूचना में आयोजन का समय छोड़ना; पाठक को कब पहुँचना है, यह बताएँ।
औपचारिक पत्र में आदेश देना; विनम्र पर स्पष्ट अनुरोध रखें।
बातचीत के तथ्य बदल देना; केवल अनावश्यक विस्तार हटाएँ।
सजावट के लिए आवश्यक सूचना काटना; विषयवस्तु को प्राथमिकता दें।
पुनरावृत्ति सूची
मैं उद्देश्य और पाठक के अनुसार रूप चुन सकता/सकती हूँ।
मैं पूरा औपचारिक तथा अनौपचारिक पत्र लिख सकता/सकती हूँ।
मैं सूचना, सन्देश और ईमेल तैयार कर सकता/सकती हूँ।
मैं स्पष्ट निमन्त्रण और उसका उत्तर लिख सकता/सकती हूँ।
मैं विज्ञापन तथा संवाद में आवश्यक विवरण दे सकता/सकती हूँ।
मैं प्रारूप, भाषा और तथ्य जाँच सकता/सकती हूँ।