Skip to content
10 MIN LESSON · HINDI

कक्षा 8 हिंदी: वाक्य और व्याकरण: Complete Concepts and Practice

हिंदी — वाक्य की पूर्णता, पदक्रम, पदबन्ध, उद्देश्य-विधेय, अर्थ और रचना के भेद, क्रिया, काल, अन्विति, कारक, वाच्य, अव्यय, विराम, रूपान्तरण और अशुद्धि-शोधन।

परिचय

वाक्य शब्दों का ऐसा व्यवस्थित समूह है जो प्रसंग में पूरा आशय व्यक्त करता है। व्याकरण हमें शब्दों का मेल, क्रिया का समय, कथन का उद्देश्य और वाक्य की रचना समझने में सहायता करता है। केवल बहुत-से शब्द साथ रख देने से हर बार सही वाक्य नहीं बनता।

“विद्यार्थी पुस्तक पढ़ रहा है” स्पष्ट कथन है। “पुस्तक विद्यार्थी रहा पढ़” में वही शब्द हैं, पर व्यवस्था बिगड़ने से अर्थ समझना कठिन होता है। दैनिक बातचीत में प्रसंग से छोटी बात समझ आ सकती है, फिर भी औपचारिक लेखन और परीक्षा में पूर्णता, शुद्धता तथा स्पष्ट सम्बन्ध आवश्यक हैं।

अधिगम उद्देश्य

  • वाक्य की पूर्णता, उद्देश्य और विधेय पहचानना।

  • अर्थ तथा रचना के आधार पर वाक्यों का वर्गीकरण करना।

  • क्रिया, कर्म, काल और सहायक क्रिया का सम्बन्ध समझाना।

  • लिंग, वचन, पुरुष और कारक के अनुसार अन्विति लागू करना।

  • वाच्य, अव्यय, विराम-चिह्न और वाक्य-रूपान्तरण का अभ्यास करना।

  • अशुद्ध वाक्यों को कारण सहित सुधारना।

मुख्य अवधारणाएँ

1. वाक्य की पूर्णता और पदक्रम

वाक्य में अर्थ की संगति, आवश्यक पदों की उपस्थिति और उपयुक्त क्रम होना चाहिए। “नीलम ने” सुनकर सामान्यतः प्रश्न रह जाता है कि नीलम ने क्या किया। “नीलम ने पत्र लिखा” पूरा आशय देता है। आकांक्षा आवश्यक अगले पद की अपेक्षा है और योग्यता अर्थ की उपयुक्तता से सम्बन्धित है।

हिन्दी का सामान्य पदक्रम कर्ता–कर्म–क्रिया है: “बच्चे पौधे लगाते हैं।” बल देने के लिए क्रम बदल सकता है—“पौधे बच्चे लगाते हैं, माली नहीं।” इसलिए हर बदला क्रम गलत नहीं। जाँचें कि अर्थ स्पष्ट है या नहीं और बल किस बात पर दिया जा रहा है।

पदबन्ध शब्दों का ऐसा समूह है जो वाक्य में एक पद का काम करता है। “लाल टोपी वाला लड़का दौड़ा” में लाल टोपी वाला लड़का पूरा संज्ञा-पदबन्ध है। विशेषण-पदबन्ध उसका गुण बता सकता है, जैसे बहुत परिश्रमी विद्यार्थी। पदबन्ध और पूरा वाक्य एक नहीं हैं।

2. उद्देश्य और विधेय

जिसके बारे में कहा जाए वह उद्देश्य और जो कहा जाए वह विधेय है। “हमारे विद्यालय के बच्चे मैदान साफ कर रहे हैं” में हमारे विद्यालय के बच्चे उद्देश्य है और मैदान साफ कर रहे हैं विधेय। केवल बच्चे कहने से विस्तारित उद्देश्य के विशेषक छूट जाते हैं।

आज्ञार्थक वाक्य में उद्देश्य कभी स्पष्ट नहीं लिखा होता: “कृपया बैठिए।” इसमें सम्बोधित व्यक्ति समझा जाता है। अपूर्ण दिखने वाले हर छोटे कथन को अशुद्ध न मानें; संवाद में “अभी नहीं” जैसे उत्तर पहले प्रश्न से अर्थ लेते हैं। लेकिन स्वतंत्र औपचारिक वाक्य लिखते समय आवश्यक सूचना दें।

3. अर्थ के आधार पर वाक्य

वाक्य का भेद केवल अन्तिम चिह्न नहीं, उसके आशय से निर्धारित करें। प्रश्नचिह्न प्रश्न का संकेत है, पर स्वर और प्रसंग भी भूमिका निभाते हैं। सामान्य विद्यालयी वर्गीकरण में निम्न भेद पढ़ाए जाते हैं।

भेद

मुख्य आशय

मौलिक उदाहरण

विधानवाचक

कथन करना

आज पुस्तकालय खुला है।

निषेधवाचक

न होना या मना करना

आज अवकाश नहीं है।

प्रश्नवाचक

जानकारी पूछना

पुस्तकालय कब खुलेगा?

आज्ञावाचक

आदेश, अनुरोध या सलाह

कृपया पंक्ति में खड़े हों।

इच्छावाचक

इच्छा या शुभकामना

तुम्हारी यात्रा शुभ हो।

विस्मयादिबोधक

तीव्र भाव

वाह! कितना सुन्दर चित्र है!

सन्देहवाचक

सम्भावना या अनिश्चितता

शायद वे कल आएँ।

संकेतवाचक

शर्त या परस्पर निर्भरता

यदि वर्षा होगी, तो खेल रुक जाएगा।

कुछ पुस्तकों में शर्त वाले वाक्य को शर्तवाचक भी कहा जाता है। स्थानीय पाठ्यपुस्तक की शब्दावली मानें, लेकिन शर्त और परिणाम का अर्थ समझना प्राथमिक है। “क्या तुम दरवाजा खोल दोगे?” रूप से प्रश्न है और प्रसंग में विनम्र अनुरोध भी हो सकता है।

4. रचना के आधार पर वाक्य

सरल वाक्य में एक मुख्य उद्देश्य-विधेय सम्बन्ध होता है। संयुक्त वाक्य में दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य समुच्चयबोधक से जुड़ते हैं। मिश्र वाक्य में मुख्य उपवाक्य के साथ आश्रित उपवाक्य होता है। केवल शब्दों की संख्या या और देखकर निर्णय न लें।

रचना

उदाहरण

पहचान

सरल

बारिश रुकने पर बच्चे बाहर गए।

रुकने पर स्वतंत्र उपवाक्य नहीं है

संयुक्त

बारिश रुकी और बच्चे बाहर गए।

दोनों खण्ड स्वतंत्र कथन हैं

मिश्र

जब बारिश रुकी, तब बच्चे बाहर गए।

जब वाला खण्ड आश्रित है

“रीमा और अमन आए” में और दो कर्ताओं को जोड़ता है; यह आवश्यक रूप से संयुक्त वाक्य नहीं बनाता। इसके विपरीत “रीमा आई और अमन बैठ गया” में दो स्वतंत्र उपवाक्य हैं। सीमित क्रिया, सम्बन्धसूचक शब्द और आशय को साथ देखकर वर्गीकरण करें।

5. सकर्मक और अकर्मक क्रिया

सकर्मक क्रिया के साथ कर्म का सम्बन्ध होता है। “रुचि ने चित्र बनाया” में क्या बनाया पूछने पर चित्र कर्म मिलता है। अकर्मक क्रिया का प्रयोग बिना ऐसे कर्म के होता है: “शिशु सो रहा है।” कहाँ सो रहा है पूछने पर स्थान मिलेगा, कर्म नहीं।

क्रिया का वर्ग उसके वास्तविक प्रयोग से देखें। “पानी उबल रहा है” अकर्मक प्रयोग है; “माँ पानी उबाल रही है” में पानी कर्म है। केवल शब्द याद करने के बजाय वाक्य में कार्य और प्रभावित वस्तु का सम्बन्ध पहचानें।

मुख्य क्रिया मूल कार्य बताती है; सहायक क्रिया काल, पक्ष या स्थिति स्पष्ट करती है। “वह लिख रहा था” में लिख मुख्य क्रिया है और रहा था कार्य की निरन्तरता तथा भूतकाल दिखाता है। “वह पत्र लिख चुका है” में पूर्णता का भाव अलग है।

6. काल और क्रिया की स्थिति

काल कार्य के समय का बोध कराता है: वर्तमान, भूत और भविष्य। क्रिया-रूप यह भी बताता है कि कार्य सामान्य है, जारी है या पूरा हो चुका है। केवल आज, कल जैसे शब्दों पर निर्भर न रहें; कल भूत और भविष्य दोनों सन्दर्भों में आ सकता है।

समय और स्थिति

उदाहरण

अर्थ

सामान्य वर्तमान

वह प्रतिदिन पढ़ता है।

नियमित आदत

जारी वर्तमान

वह अभी पढ़ रहा है।

कार्य चल रहा है

सामान्य भूत

उसने पत्र लिखा।

पिछला कार्य

जारी भूत

वह तब पढ़ रहा था।

अतीत में कार्य जारी

पूर्णता सहित वर्तमान

वह काम कर चुका है।

कार्य पूरा होने की वर्तमान स्थिति

भविष्य

वह कल पढ़ेगा।

आगे का कार्य

काल बदलते समय अर्थ का आवश्यक भाग बचाएँ। “वह पढ़ रहा था” को भविष्य में “वह पढ़ रहा होगा” करने से कभी अनुमान का भाव भी आ सकता है। यदि केवल सामान्य भविष्य माँगा गया हो, तो “वह पढ़ेगा” उचित है। प्रश्न में अपेक्षित समय और स्थिति दोनों देखें।

7. अन्विति: लिंग, वचन और पुरुष का मेल

अन्विति सम्बन्धित पदों का व्याकरणिक मेल है। “लड़की आई” और “लड़के आए” में क्रिया कर्ता के लिंग-वचन से मेल खाती है। “यह कमरा बड़ा है” लेकिन “यह मेज बड़ी है” में विशेषण संज्ञा के लिंग के अनुसार है।

ने वाले भूतकालिक सकर्मक प्रयोग में विशेष सावधानी चाहिए। “सीमा ने चिट्ठी लिखी” में बिना को वाला कर्म चिट्ठी स्त्रीलिंग है, इसलिए लिखी आता है। “सीमा ने पत्र लिखा” में पत्र पुल्लिंग है। “सीमा ने बच्चों को बुलाया” में कर्म के साथ को है, इसलिए सामान्य रूप बुलाया आता है। हर वाक्य में क्रिया को सीधे कर्ता से मिलाने का नियम पर्याप्त नहीं।

आदर में बहुवचन का प्रयोग होता है: “दादी आ गई हैं।” गलत: “दादी आ गया है।” पुरुष का मेल भी देखें: मैं जाता हूँ, तुम जाते हो, वह जाता है। वक्ता का लिंग बदलने पर मैं जाती हूँ भी सही रूप है।

8. कारक और सम्बन्ध की शुद्धता

परसर्ग अर्थ के अनुसार चुनें। “मैंने उसे पुस्तक दी” में उसे पाने वाले का बोध कराता है। “मैंने उससे पुस्तक ली” में उससे स्रोत है। को और से बदलने पर पूरा सम्बन्ध बदल सकता है।

का, की और के सामान्यतः सम्बन्धित वस्तु के अनुसार बदलते हैं: “मोहन की पुस्तक”, “मोहन का बैग”, “मोहन के जूते।” मालिक का लिंग अकेला निर्णय नहीं करता। गलत: “रीमा का किताब।” सही: “रीमा की किताब।”

अनावश्यक चिह्न से बचें। “वह अपने घर गया” स्वाभाविक है; “वह अपने को घर को गया” अर्थ और रचना दोनों बिगाड़ता है। कारक-चिह्न पहचानने का उद्देश्य केवल नाम बताना नहीं, वाक्य के सम्बन्ध स्पष्ट करना है।

9. वाच्य की मूल पहचान

कर्तृवाच्य में कर्ता और उसका कार्य प्रमुख हैं: “बालिका कविता पढ़ती है।” कर्मवाच्य में कर्म को प्रमुखता मिलती है: “कविता बालिका द्वारा पढ़ी जाती है।” रूपान्तरण में मूल कार्य, समय और सहभागी न बदलें।

भाववाच्य में क्रिया के भाव को प्रधानता दी जाती है और प्रायः अकर्मक क्रिया का सामान्य एकवचन रूप मिलता है: “मुझसे अब चला नहीं जाता।” इसे हर कर्मवाच्य के समान न समझें। यहाँ कोई कर्म कविता की तरह प्रमुख नहीं बनाया गया है।

रूप

उदाहरण

प्रमुखता

कर्तृवाच्य

माली पौधे लगाता है।

कार्य करने वाला

कर्मवाच्य

पौधे माली द्वारा लगाए जाते हैं।

प्रभावित कर्म

भाववाच्य

उससे बैठा नहीं जाता।

कार्य कर पाने या न कर पाने का भाव

रूप बदलने के बाद पढ़कर देखें कि वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक है या नहीं। हर अकर्मक वाक्य को सीधे कर्मवाच्य में बदलना सम्भव नहीं। नियम का नाम देखकर असंगत रूप न बनाएँ।

10. अव्यय और विचारों का सम्बन्ध

क्रियाविशेषण कार्य का समय, स्थान, रीति या मात्रा बता सकता है: अभी आया, बाहर बैठा, धीरे बोला, बहुत दौड़ा। सम्बन्धबोधक संज्ञा/सर्वनाम का सम्बन्ध बताता है: घर के सामने, पेड़ के नीचे। समुच्चयबोधक जोड़ता है: और, लेकिन, क्योंकि। विस्मयादिबोधक भाव प्रकट करता है: अरे!, वाह!, ओह!

संयोजक का चयन अर्थ के अनुसार करें। “वर्षा हुई, इसलिए मैदान भीग गया” कारण-परिणाम है। “वर्षा हुई, लेकिन हम समय पर पहुँचे” अपेक्षा के विरुद्ध परिणाम दिखाता है। केवल वाक्य जोड़ने के लिए किसी भी संयोजक का प्रयोग न करें।

“क्योंकि मैदान भीगा था” अकेले लिखने से अपेक्षा अधूरी रह सकती है। पूरा वाक्य होगा: “मैदान भीगा था, इसलिए खेल स्थगित हुआ” या “क्योंकि मैदान भीगा था, खेल स्थगित हुआ।” कारण और परिणाम को स्पष्ट रखिए।

11. विराम-चिह्न और अर्थ

पूर्णविराम सामान्य कथन समाप्त करता है; प्रश्नचिह्न प्रश्न तथा विस्मयादिबोधक चिह्न तीव्र भाव दिखाता है। अल्पविराम छोटी विराम-आवश्यकता या सूची में सहायता करता है। उद्धरण-चिह्न सीधे कथन या विशेष उद्धृत अंश को अलग करते हैं।

“रुको मत जाओ” में विराम से अर्थ बदल सकता है। “रुको, मत जाओ” रुकने को कहता है; “रुको मत, जाओ” जाने को कहता है। इसलिए विराम केवल सजावट नहीं, अर्थ का अंग है।

प्रत्यक्ष कथन का उदाहरण: मीरा ने कहा, “मैं कल आऊँगी।” इसे परोक्ष करते समय वक्ता और समय-सन्दर्भ देखें: “मीरा ने कहा कि वह अगले दिन आएगी।” यह रूप तब उचित है जब कथन बाद के समय से बताया जा रहा हो। हर बार कल को बिना सन्दर्भ बदले अगले दिन करना आवश्यक नहीं।

12. रूपान्तरण और अशुद्धि-शोधन

रूपान्तरण में वाक्य का मूल आशय बनाए रखना चाहिए। “वह बीमार था, इसलिए नहीं आया” का मिश्र रूप “वह नहीं आया क्योंकि वह बीमार था” है। केवल संज्ञा बदल देने या कारण उलट देने से रूपान्तरण सही नहीं होता।

अशुद्ध प्रयोग

शुद्ध प्रयोग

कारण

मुझे ठण्डा लग रही है।

मुझे ठण्ड लग रही है।

संज्ञा और क्रिया का उचित प्रयोग

मेरी भाई आया।

मेरा भाई आया।

पुल्लिंग संज्ञा से मेल

रीमा ने पत्र लिखी।

रीमा ने पत्र लिखा।

पत्र के अनुसार क्रिया

वे कल जाएगा।

वे कल जाएँगे।

बहुवचन/आदर का मेल

वाक्य-शोधन की उपयोगी क्रम-पद्धति है: पहले अर्थ, फिर कर्ता-कर्म, फिर क्रिया, उसके बाद विशेषण-परसर्ग और अन्त में वर्तनी-विराम। एक वाक्य में एक से अधिक त्रुटियाँ हो सकती हैं। केवल पहली सुधारकर न रुकें।

प्रश्न हल करने की विधि

  1. पूरा वाक्य पढ़कर उसका आशय और प्रसंग निर्धारित करें।

  2. उद्देश्य, विधेय और मुख्य क्रिया पहचानें।

  3. प्रश्न के अनुसार अर्थ-भेद या रचना-भेद का आधार चुनें।

  4. काल, वाच्य, कारक और अन्विति का सम्बन्ध जाँचें।

  5. रूपान्तरण में मूल कारण, समय और सहभागी सुरक्षित रखें।

  6. नया वाक्य पढ़कर पूर्णता, शुद्धता और विराम-चिह्न जाँचें।

सम्बन्ध

  • शब्द और पद-रचना का ज्ञान वाक्य में संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण की भूमिका स्पष्ट करता है।

  • अपठित पाठ में संयोजक, सर्वनाम और काल से घटनाओं का सम्बन्ध समझ आता है।

  • व्यावहारिक तथा रचनात्मक लेखन में स्पष्ट और शुद्ध वाक्य प्रभावी संप्रेषण का आधार हैं।

सामान्य त्रुटियाँ

  • और वाले हर वाक्य को संयुक्त मानना; स्वतंत्र उपवाक्यों की जाँच करें।

  • ने वाले हर प्रयोग में क्रिया कर्ता से मिलाना; कर्म और को की उपस्थिति भी देखें।

  • काल बदलते समय मूल आशय बदल देना; समय और कार्य की स्थिति अलग पहचानें।

  • विराम को महत्वहीन मानना; जाँचें कि उससे निर्देश या कथन का अर्थ तो नहीं बदलता।

पुनरावृत्ति सूची

  • मैं वाक्य की पूर्णता और उद्देश्य-विधेय पहचान सकता/सकती हूँ।

  • मैं अर्थ तथा रचना के आधार पर वाक्य का भेद बता सकता/सकती हूँ।

  • मैं सकर्मक-अकर्मक क्रिया और काल समझा सकता/सकती हूँ।

  • मैं अन्विति और कारक के अनुसार वाक्य शुद्ध कर सकता/सकती हूँ।

  • मैं सरल वाच्य तथा वाक्य-रूपान्तरण कर सकता/सकती हूँ।

  • मैं उचित विराम-चिह्न लगाकर स्पष्ट वाक्य लिख सकता/सकती हूँ।

Practise this topic →

Discussion

Sign in to join the discussion.

Sign in

No comments yet. Be the first to share your thoughts.