परिचय
भाषा में ध्वनियाँ मिलकर शब्द बनाती हैं और शब्द वाक्य में जुड़कर विचार व्यक्त करते हैं। शब्द-रचना समझने से नए शब्दों का अर्थ पहचानना, सही रूप चुनना और स्पष्ट लिखना आसान होता है। शब्द का केवल अर्थ नहीं, वाक्य में उसका काम भी महत्वपूर्ण है।
“खेल” कभी गतिविधि का नाम है और कभी आदेश में क्रिया का रूप। इसलिए व्याकरण की पहचान शब्द को अलग देखकर नहीं, उसके प्रयोग से करें। इस अध्याय में रूप, अर्थ और कार्य को उदाहरणों के साथ जोड़ा गया है, ताकि विद्यार्थी केवल परिभाषा याद करने के बजाय भाषा का विश्लेषण कर सके।
अधिगम उद्देश्य
पहचानें कि वर्ण, शब्द और पद में क्या अंतर है।
वर्गीकृत करें कि संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया क्या काम करते हैं।
बनाएँ कि उपसर्ग और प्रत्यय से अर्थ तथा रूप कैसे बदलते हैं।
समझें कि संयुक्त शब्द और समास का विग्रह कैसे किया जाता है।
चुनें कि प्रसंग में कौन-सा पर्याय, विलोम या शुद्ध रूप उचित है।
मुख्य अवधारणाएँ
1. ध्वनि, वर्ण और मात्रा
वर्ण भाषा की मूल ध्वनियों को लिखने का चिह्न है। स्वर स्वतंत्र रूप से बोले जा सकते हैं, जबकि व्यंजन के उच्चारण में स्वर का सहारा होता है। व्यंजन के साथ स्वर का लिखित रूप मात्रा कहलाता है। क, का, कि और की में स्वर बदलने से रूप और अर्थ बदल सकते हैं।
इ और ई का अंतर छोटा दिख सकता है, लेकिन दिन और दीन अलग शब्द हैं। अनुस्वार, चंद्रबिंदु और विसर्ग का प्रयोग भी ध्यान से करें। हँस और हंस का अर्थ प्रसंग तथा सही लेखन से अलग होता है। शुद्ध लेखन में ध्वनि, मात्रा और अर्थ तीनों की जाँच उपयोगी है; केवल बोलचाल की समानता पर्याप्त नहीं।
2. शब्द और पद
शब्द सार्थक वर्णसमूह है; वही शब्द वाक्य में व्याकरणिक संबंध के साथ प्रयुक्त हो, तो पद कहलाता है। “बालक” स्वतंत्र शब्द है। “बालक ने चित्र बनाया” में वह कर्ता के रूप में संबंधित पद है। पद की भूमिका वाक्य से स्पष्ट होती है।
रचना के आधार पर रूढ़, यौगिक और योगरूढ़ शब्दों का सामान्य परिचय भी उपयोगी है। घर सामान्य रूढ़ शब्द है; विद्यालय विद्या और आलय से बना यौगिक शब्द है। पंकज का अर्थ सामान्यतः कमल है, यद्यपि उसका रचनात्मक अर्थ कीचड़ में जन्मा है; विशेष अर्थ के कारण यह योगरूढ़ उदाहरण है। हर लंबे शब्द को मनमाने छोटे टुकड़ों में न बाँटें।
3. संज्ञा और उसके रूप
संज्ञा किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, जाति या भाव का नाम है। व्यक्तिवाचक संज्ञा विशेष नाम, जातिवाचक किसी वर्ग का नाम और भाववाचक गुण या अवस्था का नाम बताती है। सीमा, नदी और मिठास क्रमशः इनके उदाहरण हैं। नाम का प्रकार प्रसंग से भी बदल सकता है।
लिंग और वचन के कारण संबंधित शब्दों के रूप बदलते हैं। “लड़की आई” और “लड़कियाँ आईं” में वचन का प्रभाव दिखता है। “मेज” का बहुवचन सीधा प्रयोग करते समय अक्सर मेजें होता है, जबकि “मेजों पर” में परसर्ग से पहले रूप बदलता है। सही रूप को पूरे पदबंध में देखें, केवल एकवचन के अंत से नियम न गढ़ें।
4. सर्वनाम और संदर्भ
सर्वनाम संज्ञा के स्थान पर आता है, जैसे मैं, तुम, वह, कोई और कौन। पुरुषवाचक, प्रश्नवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक तथा संबंधवाचक प्रयोग अलग अर्थ देते हैं। “कौन आया?” प्रश्न है; “कोई आया है” अनिश्चित व्यक्ति बताता है।
“रीना ने सना से कहा कि वह पुस्तक लाए” में वह किसके लिए है, यह अस्पष्ट हो सकता है। जरूरत हो तो नाम दोहराएँ। “जो मेहनत करता है, वह सीखता है” में जो और वह का संबंध स्पष्ट है। सर्वनाम चुनते समय व्यक्ति, वचन, आदर और संदर्भ देखें; शब्द बचाने के लिए अर्थ अस्पष्ट न करें।
5. विशेषण और क्रिया
विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है। मीठा आम में मीठा गुण, तीन आम में तीन संख्या और कुछ पानी में कुछ मात्रा बताता है। सभी विशेषण हर स्थिति में रूप नहीं बदलते। “लंबा रास्ता” और “लंबी सड़क” में बदलाव है, जबकि “सुंदर घर” और “सुंदर कहानी” में सुंदर समान रहता है।
क्रिया कार्य, घटना या अवस्था व्यक्त करती है। “बच्चा सोता है” में सोना अकर्मक है; “बच्चा पुस्तक पढ़ता है” में पढ़ना कर्म लेता है। मुख्य क्रिया के साथ सहायक क्रिया समय और अवस्था स्पष्ट कर सकती है। “पढ़ रहा है” में पढ़ मुख्य अर्थ देता है और रहा है प्रक्रिया तथा वर्तमान का संकेत देते हैं।
6. विकारी और अविकारी शब्द
विकारी शब्दों के रूप व्याकरणिक कारणों से बदल सकते हैं, जैसे संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के अनेक रूप। अविकारी शब्द सामान्यतः समान रहते हैं, जैसे धीरे, लेकिन और यहाँ। रूप बदलना और अर्थ बदलना अलग बातें हैं।
“वह धीरे चलता है” तथा “वे धीरे चलते हैं” में क्रिया बदली, लेकिन धीरे नहीं बदला। क्रियाविशेषण क्रिया की रीति, समय, स्थान या मात्रा बता सकता है। और, लेकिन, क्योंकि जैसे समुच्चयबोधक संबंध जोड़ते हैं। वाह प्रसन्नता और अरे आश्चर्य व्यक्त कर सकता है। प्रत्येक अव्यय का काम पहचानें; सबको केवल न बदलने वाले शब्द कहकर न छोड़ें।
7. उपसर्ग से शब्द बनना
उपसर्ग मूल शब्द के पहले जुड़कर अर्थ में परिवर्तन करता है। अनुशासन में अनु, अपमान में अप और पुनर्लेखन में पुनर् का योगदान समझा जा सकता है। सुगम तथा दुर्गम में सु और दुर् सुविधा तथा कठिनता का अंतर दिखाते हैं।
उपसर्ग जोड़ने से बना प्रत्येक रूप प्रचलित और अर्थपूर्ण होना चाहिए। किसी भी शब्द के आगे अ लगा देने से उसका सही विलोम नहीं बन जाता। अन्याय में अ निषेध देता है, लेकिन अनार को अ और नार में बाँटना उचित नहीं। पहचान के लिए मूल रूप, अर्थ और स्वीकृत प्रयोग तीनों देखें। ध्वनि-परिवर्तन वाले कठिन उदाहरणों को शिक्षक की सहायता से समझें।
8. प्रत्यय और शब्द-परिवार
प्रत्यय मूल शब्द के बाद जुड़ता है। सुंदर से सुंदरता में ता भाव का नाम बनाता है; मिठास में आस गुण का भाव व्यक्त करता है; लिखाई में आई कार्य या परिणाम से जुड़ा रूप बनाती है। बालक से बालपन और मित्र से मित्रता अर्थ-संबंध दिखाते हैं।
रूप बदलने वाले चिह्न और नया शब्द बनाने वाले प्रत्यय का उद्देश्य अलग हो सकता है। लड़का से लड़के वचन या कारक के अनुसार रूप है, जबकि लड़कपन नया भाववाचक शब्द है। शब्द-परिवार बनाते समय हर रूप का वाक्य बनाएँ: मित्र आया; मित्रता बनी। इससे संज्ञा और गुण या भाव के बीच अंतर स्पष्ट होता है।
9. समास और विग्रह का परिचय
समास में संबंधित पद संक्षिप्त होकर संयुक्त शब्द बनाते हैं। विग्रह उनका संबंध खोलकर बताता है। राजपुत्र का विग्रह राजा का पुत्र और माता-पिता का माता और पिता है। केवल शब्द तोड़ना पर्याप्त नहीं; का, और या अन्य संबंध भी स्पष्ट करना चाहिए।
उदाहरण | विग्रह | प्रमुख संबंध |
|---|---|---|
राजपुत्र | राजा का पुत्र | संबंध, तत्पुरुष |
नीलकमल | नीला कमल | विशेषण और विशेष्य, कर्मधारय |
माता-पिता | माता और पिता | दोनों पद, द्वंद्व |
प्रतिदिन | प्रत्येक दिन | अव्ययीभाव का प्रयोग |
कक्षा के अनुसार इन सामान्य प्रकारों पर ध्यान दें। बहुव्रीहि जैसे संदर्भ-निर्भर उदाहरण में संयुक्त शब्द किसी तीसरे व्यक्ति का बोध करा सकता है; बिना प्रसंग हर संयुक्त शब्द को वही प्रकार न दें। संधि में ध्वनियों का परिवर्तन मुख्य है, जबकि समास में पदों का अर्थ-संबंध।
10. शब्द-संबंध और अर्थ
पर्यायवाची निकट अर्थ देते हैं, जैसे जल और पानी। सभी पर्याय हर प्रसंग में समान सहज नहीं होते। “जल संरक्षण” स्वाभाविक है, जबकि बातचीत में “पानी पीना” अधिक सामान्य हो सकता है। विलोम विरोधी अर्थ देते हैं, जैसे लाभ और हानि।
अनेकार्थी शब्द का अर्थ वाक्य से तय होता है। कल बीता या आने वाला दिन भी हो सकता है और मशीन के लिए भी प्रयुक्त हो सकता है। वाक्य के काल से समय-संदर्भ पहचानें। अनेक शब्दों के लिए एक शब्द, जैसे जो पढ़ा न गया हो के लिए अपठित, संक्षिप्त अभिव्यक्ति देता है। कठिन शब्द चुनने से पहले स्पष्टता देखें।
11. शुद्ध प्रयोग और संपादन
अशुद्ध वाक्य “वे अच्छा लड़की हैं” में सर्वनाम, विशेषण और संज्ञा का मेल नहीं है। संदर्भ के अनुसार “वह अच्छी लड़की है” या आदरसूचक “वे अच्छी शिक्षिका हैं” सही होगा। इसलिए सुधार में केवल एक अंत बदलना हमेशा पर्याप्त नहीं होता।
“मेहनती विद्यार्थी ने सावधानी से उत्तर लिखा” में मेहनती विशेषण, विद्यार्थी संज्ञा, सावधानी से रीति बताने वाला पदबंध और लिखा क्रिया है। एक ही वाक्य को विभिन्न दृष्टियों से पहचानने का अभ्यास करें। संपादन के बाद वर्तनी, मात्रा, लिंग, वचन और अर्थ जाँचें। यदि सही व्याकरण के बावजूद संदर्भ अस्पष्ट है, तो शब्दों का क्रम या संज्ञा भी बदलें।
प्रश्न हल करने की विधि
शब्द को उसके पूरे वाक्य और अर्थ के साथ पढ़ें।
पहचानें कि वह नाम, गुण, क्रिया या संबंध में से क्या बता रहा है।
रचना के प्रश्न में मूल शब्द, उपसर्ग या प्रत्यय अलग करें।
समास का विग्रह अर्थ-संबंध सहित करें।
अपना उत्तर उदाहरण में रखकर शुद्धता और अर्थ की जाँच करें।
सम्बन्ध
वाक्य-व्याकरण में पदों का मेल और उनका कार्य स्पष्ट होता है।
अपठित पठन में प्रसंगानुसार शब्दार्थ चुनने की क्षमता काम आती है।
लेखन में शब्द-परिवार और पर्याय से सटीक तथा विविध अभिव्यक्ति बनती है।
सामान्य त्रुटियाँ
हर लंबे शब्द को अर्थहीन टुकड़ों में बाँटना शब्द-रचना नहीं है।
सर्वनाम का संदर्भ अस्पष्ट छोड़ने से पाठक गलत व्यक्ति समझ सकता है।
हर विशेषण का रूप बदलना आवश्यक मानना सुंदर जैसे शब्दों में गलती कराता है।
समास और संधि को समान मानना अर्थ-संबंध और ध्वनि-परिवर्तन को मिला देता है।
पुनरावृत्ति सूची
मैं शब्द और पद का अंतर उदाहरण से बता सकता/सकती हूँ।
मैं मुख्य शब्द-भेद उनके प्रयोग से पहचान सकता/सकती हूँ।
मैं उपसर्ग और प्रत्यय से बने शब्द समझ सकता/सकती हूँ।
मैं सामान्य समस्त पदों का सही विग्रह कर सकता/सकती हूँ।
मैं संदर्भ देखकर शब्द और उसके शुद्ध रूप चुन सकता/सकती हूँ।