परिचय
रोजमर्रा के जीवन में हमें ऐसी बातें लिखनी पड़ती हैं जिनसे कोई काम हो सके। संदेश से बदला हुआ समय बताया जाता है, सूचना से कार्यक्रम की जानकारी मिलती है और पत्र से अनुरोध किया जाता है। ऐसे लेखन में सुंदर शब्दों से अधिक स्पष्ट और सही विवरण जरूरी हैं।
यह अध्याय संदेश, सूचना, पत्र, ईमेल, आमंत्रण और छोटे विज्ञापन का अभ्यास कराता है। सभी नमूने मौलिक हैं। परीक्षा में दिए नाम, तिथि, सीमा और प्रारूप का पालन करें; अभ्यास का नमूना प्रश्न से अलग हो तो उसे ज्यों का त्यों न दोहराएँ।
अधिगम उद्देश्य
पाठक, उद्देश्य और आवश्यक विवरण की योजना तैयार करें।
संदेश और सूचना का सही प्रारूप प्रयोग करें।
अनौपचारिक तथा औपचारिक पत्र का निर्माण करें।
ईमेल, आमंत्रण और विज्ञापन का प्रसंगानुकूल लेखन करें।
प्रारूप और भाषा की जाँच से संपादन करें।
मुख्य अवधारणाएँ
1. उद्देश्य, पाठक और आवश्यक जानकारी
व्यावहारिक लेखन पाठक को सूचना देने, अनुरोध करने या किसी कार्य के लिए मार्गदर्शन देने का लेखन है। पहले पूछें कि किसे लिखा जा रहा है, क्यों लिखा जा रहा है और पढ़ने के बाद उसे क्या करना चाहिए। मित्र को दिया संदेश और प्रधानाचार्य को दिया आवेदन एक जैसे नहीं होंगे।
कार्यक्रम में क्या, कब, कहाँ, किसके लिए और संपर्क किससे जैसे प्रश्न महत्त्वपूर्ण हैं। खोई वस्तु में पहचान और सुरक्षित वापसी का माध्यम जरूरी है। दिए हुए विवरण न बदलें। यदि काल्पनिक विवरण जोड़ने की अनुमति हो तो आपस में मेल रखें। कार्यक्रम से बाद की पंजीकरण-तिथि अनजाने में लिखना पाठक को भ्रमित करेगा। अनावश्यक निजी जानकारी न दें। अभ्यास में काल्पनिक पते उपयोगी हैं; वास्तविक व्यक्ति का दूरभाष क्रमांक बिना अनुमति लिखना उचित नहीं।
2. संदेश का प्रारूप और पूरा नमूना
संदेश किसी जरूरी बात को संक्षेप में पहुँचाता है। संबोधित व्यक्ति, आवश्यक तिथि या समय, मुख्य सूचना और प्रेषक का नाम लिखें। घटना का कारण उपयोगी हो सकता है, लेकिन लंबी भूमिका में जरूरी बात छिपनी नहीं चाहिए।
संदेश
दीपा के लिए १२ अगस्त, अपराह्न चार बजे
चित्रकला समूह की बैठक आज कक्ष सात के बजाय पुस्तकालय में होगी। कक्ष सात में सफाई चल रही है। बैठक साढ़े चार बजे शुरू होगी। अपना चित्र-पटल और रंग साथ लाना। मैंने समूह की अध्यापिका को भी स्थान बदलने की जानकारी दे दी है।
अमन
नमूना बताता है कि बैठक रद्द नहीं हुई, केवल स्थान बदला है। समय और लाने वाली वस्तुएँ भी स्पष्ट हैं। किसी के बोले हुए संदेश को लिखते समय अपनी ओर से नया वादा न जोड़ें। नाम और समय सुनकर दोहरा लेने से गलती घटती है। संदेश इतना छोटा भी न हो कि पाठक को फिर वही जानकारी पूछनी पड़े।
3. सूचना का प्रारूप और मौलिक नमूना
सूचना किसी समूह के लिए औपचारिक घोषणा है। सामान्य प्रारूप में संस्था का नाम, सूचना, दिनांक, विषय, मुख्य विवरण और जारी करने वाले का नाम या पद होता है। उत्तर-पुस्तिका में अपेक्षित हो तो सरल चौखटा बना सकते हैं, पर सजावट के लिए जानकारी न छोड़ें।
प्रभात विद्यालय, भोपाल सूचना १४ अगस्त २०XX कहानी-पुस्तक विनिमय
कक्षा छह और सात के इच्छुक विद्यार्थी २१ अगस्त को मध्यावकाश में पुस्तकालय में कहानी-पुस्तक विनिमय में भाग ले सकते हैं। एक साफ और उपयोगी पुस्तक लाएँ। उस पर अपना नाम हटाई जा सकने वाली पर्ची पर लिखें। पुस्तकालयाध्यक्ष के पास १९ अगस्त तक नाम दर्ज कराएँ। भाग लेना वैकल्पिक है।
काव्या सेन पठन समूह प्रतिनिधि
पात्रता, स्थान, समय और पंजीकरण का माध्यम पाठक को कार्रवाई करने देते हैं। सूचना में निजी पत्र की तरह लंबा अभिवादन या हालचाल नहीं चाहिए। शीर्षक आकर्षक हो सकता है, लेकिन केवल ‘आइए, पढ़ें’ लिखना पूरे विवरण का विकल्प नहीं है।
4. अनौपचारिक पत्र और पूरा उदाहरण
अनौपचारिक पत्र परिवार या मित्र को आत्मीय भाषा में लिखा जाता है। प्रेषक का पता, दिनांक, संबोधन, अनुच्छेदों में मुख्य बात, समापन और नाम सामान्य अंग हैं। आत्मीयता के साथ स्पष्ट वाक्य और विषयानुकूल क्रम रखें।
२७ पीपल मार्ग देहरादून १५ अगस्त २०XX
प्रिय सखी राधा,
तुमने हमारी कक्षा के नए पठन कोने के बारे में पूछा था। हमने खिड़की के पास एक छोटी अलमारी रखी है। उसके पास साफ दरी बिछाई गई है ताकि खाली समय में विद्यार्थी बैठकर पढ़ सकें।
पिछले सप्ताह मैंने पक्षियों पर छोटी कहानियों की पुस्तक चुनी। पढ़ने के बाद प्रत्येक विद्यार्थी पुस्तक का नाम और अपनी पसंद का एक कारण साझा करता है। हमने पुस्तकों को सही जगह लौटाने की बारी भी तय की है।
अगली बार मिलने पर अपनी प्रिय कहानी का नाम बताना। मैं उसे हमारे पुस्तकालय में खोजना चाहूँगी।
स्नेह सहित, माधवी
पत्र में प्रश्न का उत्तर, अपना अनुभव और संबंधित अनुरोध है। हर पत्र में एक जैसी असंबंधित घटनाएँ न भरें। यदि प्रश्न आमंत्रण का है तो उसके आवश्यक विवरण भी दें; केवल हालचाल से कार्य पूरा नहीं होगा।
5. औपचारिक आवेदन और नमूना
औपचारिक पत्र किसी पदाधिकारी या संस्था को स्पष्ट उद्देश्य से लिखा जाता है। उपयुक्त संबोधन, विषय, संक्षिप्त कारण, विनम्र अनुरोध और पहचान जरूरी हैं। आवेदन में तथ्य गढ़कर अनुमति पहले से मिली हुई न बताएँ।
कक्षा छह अ सरस्वती विद्यालय, इंदौर १६ अगस्त २०XX
प्रधानाचार्य महोदय/महोदया सरस्वती विद्यालय, इंदौर
विषय: मासिक अतिरिक्त पुस्तकालय-अवधि का अनुरोध
महोदय/महोदया,
हमारी कक्षा के विद्यार्थी पुस्तकों के चुनाव और पठन-चर्चा के लिए प्रत्येक माह एक अतिरिक्त पुस्तकालय-अवधि चाहते हैं। नियमित अवधि में कई बार पुस्तक चुनने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
हम पुस्तकालय के नियमों का पालन करेंगे और ली गई पुस्तकें समय पर लौटाएँगे। कृपया अन्य पाठों को बाधित किए बिना उपयुक्त व्यवस्था पर विचार करें।
धन्यवाद। भवदीय, नील वर्मा कक्षा प्रतिनिधि, छह अ
नमूना विनम्र है, लेकिन अस्पष्ट नहीं। किस सुविधा का अनुरोध है और क्यों, दोनों स्पष्ट हैं। अत्यधिक प्रशंसा या धमकी से औपचारिकता नहीं बढ़ती। विद्यालय का निर्धारित प्रारूप हो तो उसी का पालन करें।
6. ईमेल और आमंत्रण
ईमेल में स्पष्ट विषय, संबोधन, मुख्य संदेश और प्रेषक की पहचान रखें। डाक-पत्र का पूरा पता हर ईमेल में आवश्यक नहीं, जब तक प्रश्न विशेष रूप से न माँगे। संलग्नक का उल्लेख तभी करें जब वास्तव में अपेक्षित सामग्री भेजी जा रही हो।
विषय: पुस्तक-विनिमय में लाने योग्य पुस्तक के बारे में प्रश्न
आदरणीय पुस्तकालयाध्यक्ष,
मैं २१ अगस्त के कहानी-पुस्तक विनिमय में भाग लेना चाहता हूँ। क्या छोटी कहानियों का संग्रह लाया जा सकता है, या एक लंबी कहानी की पुस्तक आवश्यक है? मैं निर्धारित तिथि से पहले अपना नाम दर्ज करा दूँगा।
धन्यवाद। यश, कक्षा छह
आमंत्रण में आयोजक, अवसर, तिथि, समय और स्थान स्पष्ट करें। उदाहरण: ‘हमारी कक्षा की कहानी-प्रस्तुति में आपका स्वागत है। प्रस्तुति २५ अगस्त को प्रातः दस बजे विद्यालय सभागार में होगी। आयोजक: कक्षा छह।’ ‘जल्दी आना’ अकेले समय नहीं बताता। वास्तविक संदेश भेजते समय सही प्राप्तकर्ता और आवश्यक वयस्क मार्गदर्शन का ध्यान रखें।
7. लघु विज्ञापन, निर्देश और पहचान
विज्ञापन किसी वस्तु, सेवा या आवश्यकता की सूचना प्रभावी ढंग से देता है। खोई वस्तु के विज्ञापन में उपयोगी पहचान दें, हर निजी विवरण नहीं। आकर्षक भाषा तथ्यपूर्ण रहनी चाहिए।
खोया-पाया
विद्यालय के पूर्वी फाटक के पास १३ अगस्त को नीले कपड़े का पुस्तक-थैला छूट गया। सामने पीले पत्ते का छोटा चिह्न है। उसमें हस्तलिखित विज्ञान-चित्र हैं। पाने वाला कृपया विद्यालय कार्यालय में ‘नीला थैला’ बताकर जमा कराए। सामग्री पढ़ाई के लिए महत्त्वपूर्ण है।
निर्देश क्रमबद्ध कार्रवाई बताते हैं। पुस्तक लौटाने के निर्देश में पहले पर्ची जाँचें, फिर पुस्तक निर्धारित मेज पर दें और दर्ज वापसी की पुष्टि करें। स्पष्ट क्रिया शब्द चुनें। ‘पुस्तक रख दी गई’ सूचना देता है, जबकि ‘पुस्तक निर्धारित मेज पर रखें’ निर्देश है। जहाँ सुरक्षा जरूरी हो वहाँ उपयुक्त सावधानी लिखें। बच्चों को असुरक्षित उपकरण चलाने के निर्देश देकर लेखन-अभ्यास पूरा न करें।
8. मूल्यांकन-सूची और संपादन
एक उपयोगी मूल्यांकन-सूची में कार्य-पूर्ति, प्रारूप, आवश्यक जानकारी, क्रम, भाषा और शुद्धता आती है। अंकों का निश्चित विभाजन प्रश्नपत्र या शिक्षक के निर्देश से लें; एक सामान्य नमूना हर परीक्षा की आधिकारिक योजना नहीं है।
पहले जाँचें कि पाठक कौन है और उद्देश्य पूरा हुआ या नहीं। फिर तिथि, समय, स्थान, नाम, पात्रता और संपर्क का मेल देखें। अंत में वर्तनी, सर्वनाम, क्रिया और विरामचिह्न सुधारें। यदि सूचना पंजीकरण माँगती है पर कहाँ करना है नहीं बताती, तो माध्यम जोड़ें। यदि पत्र में जानकारी माँगी है, तो उसे निश्चित बुकिंग घोषित न करें। संक्षेप का अर्थ अधूरापन नहीं है। वही लेखन सफल है जिससे पाठक सही बात समझ सके और अपेक्षित अगला कदम उठा सके, भले ही उसमें कठिन शब्द या विस्तृत सजावट न हो।
प्रश्न हल करने की विधि
प्रश्न में पूछा गया काम पहचानें। परिभाषा, उदाहरण, सुधार और कारण अलग-अलग माँगें हैं। उत्तर शुरू करने से पहले तय करें कि किस नियम या पाठ-साक्ष्य का उपयोग करना है।
वाक्य या अनुच्छेद पूरा पढ़ें और जरूरी शब्द अलग करें। केवल पहले शब्द को देखकर निष्कर्ष न निकालें। लिंग, वचन, काल और प्रसंग का मेल जाँचें; जो जानकारी नहीं दी गई है, उसे अपनी ओर से तथ्य न बनाएँ।
चुने गए नियम को उदाहरण पर लागू करके बीच का काम स्पष्ट करें। परिवर्तन वाले प्रश्न में मूल अर्थ बचाएँ। पाठ-आधारित प्रश्न में संबंधित घटना या पंक्ति का संकेत देकर अपने निष्कर्ष का कारण समझाएँ।
अंत में उत्तर दोबारा पढ़ें। वर्तनी, विरामचिह्न और वाक्य की पूर्णता जाँचें। विकल्पों में निकट लगने वाले गलत उत्तर को हटाने का कारण सोचें और पुष्टि करें कि केवल एक विकल्प पूरी तरह उपयुक्त है।
सम्बन्ध
वाक्य-व्याकरण से विनम्र निवेदन और स्पष्ट निर्देश बनते हैं।
अपठित अंशों में तिथि और शर्तें ध्यान से पढ़ने का अभ्यास मिलता है।
रचनात्मक लेखन में भी पाठक और उद्देश्य की पहचान उपयोगी है।
सामान्य त्रुटियाँ
केवल नारा लिखना पर्याप्त नहीं; तिथि, समय और स्थान भी दें।
हर रूप को पत्र बना देना गलत है; उद्देश्य के अनुसार प्रारूप चुनें।
दिए हुए तथ्य बदलना गलत है; नाम और समय सुरक्षित रखें।
संक्षेप के नाम पर संपर्क हटाना गलत है; पाठक का अगला कदम स्पष्ट रखें।
पुनरावृत्ति सूची
मैं पाठक, उद्देश्य और आवश्यक विवरण की योजना तैयार कर सकता/सकती हूँ।
मैं संदेश और सूचना का सही प्रारूप प्रयोग कर सकता/सकती हूँ।
मैं अनौपचारिक तथा औपचारिक पत्र का निर्माण कर सकता/सकती हूँ।
मैं ईमेल, आमंत्रण और विज्ञापन का प्रसंगानुकूल लेखन कर सकता/सकती हूँ।
मैं प्रारूप और भाषा की जाँच से संपादन कर सकता/सकती हूँ।