Skip to content
9 MIN LESSON · HINDI

कक्षा 10 हिंदी: वाक्य और व्याकरण: Complete Concepts and Practice

हिंदी — वाक्य के अंग, अर्थगत वाक्यभेद, सरल-संयुक्त-मिश्र रचना, उपवाक्य, अर्थ-सुरक्षित रूपांतरण, वाच्य, अन्विति, अशुद्धि-संशोधन और मुहावरों का प्रसंगगत प्रयोग।

परिचय

वाक्य-व्याकरण में यह समझा जाता है कि शब्द मिलकर पूर्ण अर्थ कैसे व्यक्त करते हैं। प्रश्न पूछना, सूचना देना, इच्छा प्रकट करना और किसी कार्य का निषेध करना अलग अर्थगत प्रयोजन हैं। इसी तरह एक साधारण विचार और कई जुड़े हुए विचारों की संरचना भी अलग होती है। सही पहचान के लिए केवल किसी एक शब्द को नहीं, पूरे वाक्य के संबंधों को पढ़ना आवश्यक है।

‘बारिश हुई, इसलिए खेल रुका’ और ‘बारिश होने के कारण खेल रुका’ लगभग एक ही बात कहते हैं, लेकिन उनकी रचना अलग है। परीक्षा में ऐसा रूपांतरण करते समय कारण, समय और निषेध सुरक्षित रखने होते हैं। इस अध्याय में वाक्यभेद, उपवाक्य, रूपांतरण, वाच्य, अन्विति, अशुद्धि-संशोधन और मुहावरों का प्रयोग सुलझे उदाहरणों के साथ दिया गया है।

अधिगम उद्देश्य

  • पहचानें कि वाक्य के मुख्य अंग और उपवाक्य कौन-से हैं।

  • वर्गीकृत करें कि अर्थ और रचना के अनुसार वाक्य का भेद क्या है।

  • बदलें कि सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य अर्थ सुरक्षित रखते हुए कैसे बनाए जाते हैं।

  • स्पष्ट करें कि कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य में क्या अंतर है।

  • सुधारें कि लिंग, वचन, कारक और क्रिया की अशुद्धियाँ कैसे पहचानी जाती हैं।

  • प्रयोग करें कि मुहावरे वाक्य के प्रसंग में कैसे उपयुक्त बैठते हैं।

मुख्य अवधारणाएँ

1. पूर्ण अर्थ और वाक्य के अंग

वाक्य पदों का ऐसा व्यवस्थित समूह है जो प्रसंग में पूर्ण अर्थ देता है। ‘क्योंकि रास्ता बंद था’ कारण बताता है, पर मुख्य परिणाम के बिना अधूरा है। ‘क्योंकि रास्ता बंद था, हम लौट आए’ पूर्ण कथन है। प्रत्येक लंबे समूह को पूरा वाक्य मान लेना गलत है।

विद्यालयी विश्लेषण में उद्देश्य वह है जिसके विषय में कुछ कहा जाता है और विधेय उसके बारे में कही गई बात। ‘पुराने पुस्तकालय की बड़ी खिड़की खुल गई’ में उद्देश्य ‘पुराने पुस्तकालय की बड़ी खिड़की’ और विधेय ‘खुल गई’ है। उद्देश्य केवल खिड़की लिखने से उसके विस्तार का भाग छूट सकता है।

उपवाक्य में सामान्यतः अपना कर्ता और क्रिया-संबंध होता है। ‘जब घंटी बजी’ और ‘विद्यार्थी बाहर आए’ मिलकर एक बड़ा वाक्य बना सकते हैं। इसके विपरीत ‘घंटी बजने पर’ में स्वतंत्र समापिका क्रिया नहीं है; वह पदसमूह है। यही अंतर सरल और मिश्र वाक्य पहचानने में महत्त्वपूर्ण है।

2. अर्थ के आधार पर वाक्यभेद

भेद

प्रयोजन

मौलिक उदाहरण

विधानवाचक

सामान्य सूचना या स्वीकृति

पुस्तकालय आज खुला है

निषेधवाचक

नकार या मनाही

पुस्तकालय आज नहीं खुलेगा

प्रश्नवाचक

प्रश्न पूछना

पुस्तकालय कब खुलेगा?

आज्ञावाचक

आदेश, अनुरोध या सलाह

कृपया पुस्तक समय पर लौटाएँ

इच्छावाचक

इच्छा या शुभकामना

काश, सबको पढ़ने का अवसर मिले!

संदेहवाचक

संभावना या अनिश्चितता

शायद वह आज आए

विस्मयादिबोधक

आश्चर्य आदि तीव्र भाव

वाह, कितना सुंदर चित्र है!

संकेतवाचक

शर्त और उसके परिणाम का संबंध

यदि समय मिला, तो हम पढ़ेंगे

अर्थ और चिह्न दोनों देखें। ‘क्या तुम कृपया दरवाजा बंद करोगे?’ रूप में प्रश्न है और व्यवहार में विनम्र अनुरोध भी। यदि वस्तुनिष्ठ वर्गीकरण अपेक्षित हो तो प्रश्न में दिए आधार का पालन करें। केवल विस्मयादिबोधक चिह्न देखकर अर्थ न तय करें; कभी इच्छा और विस्मय दोनों में वह चिह्न मिल सकता है।

3. रचना के अनुसार सरल वाक्य

सरल वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य या एक समापिका क्रियात्मक केंद्र होता है। यह आवश्यक नहीं कि उसमें बहुत कम शब्द हों। ‘सुबह से बरामदे में बैठा विद्यार्थी ध्यानपूर्वक चित्र बना रहा है’ लंबा है, पर एक मुख्य कथन है। ‘बना रहा है’ संयुक्त क्रियात्मक रूप है, अलग-अलग उपवाक्य नहीं।

‘रमा ने खाना खाकर पढ़ाई की’ भी सरल है। खाकर पूर्वकालिक क्रिया है; मुख्य कथन पढ़ाई की है। इसलिए केवल क्रिया जैसे दिखने वाले हर रूप की गिनती करके संयुक्त वाक्य नहीं कहना चाहिए। प्रश्न यह है कि कितने स्वतंत्र या आश्रित उपवाक्य बन रहे हैं।

4. संयुक्त और मिश्र वाक्य

संयुक्त वाक्य में दो या अधिक समान स्तर के स्वतंत्र उपवाक्य जुड़े होते हैं। ‘बादल घिरे और हवा चलने लगी’ में दोनों कथन स्वतंत्र हो सकते हैं। और, लेकिन, अथवा, इसलिए जैसे संयोजक संबंध स्पष्ट करते हैं।

मिश्र वाक्य में एक मुख्य और कम-से-कम एक आश्रित उपवाक्य होता है। ‘जब बादल घिरे, तब हम लौट आए’ में जब वाला भाग समय का आश्रित उपवाक्य है। ‘मुझे विश्वास है कि वह आएगा’ में कि वाला भाग विश्वास की विषयवस्तु बताता है। ‘जो विद्यार्थी अभ्यास करता है, वह सीखता है’ में जो वाला भाग विद्यार्थी की पहचान करता है।

संरचना

संबंध

उदाहरण

सरल

एक मुख्य कथन

वर्षा होने पर हम लौटे

संयुक्त

स्वतंत्र कथनों का मेल

वर्षा हुई और हम लौटे

मिश्र

मुख्य तथा आश्रित उपवाक्य

जब वर्षा हुई, तब हम लौटे

विरामचिह्न अकेले वर्गीकरण नहीं तय करते। संयोजक लुप्त भी हो सकता है; अर्थ और उपवाक्यों का संबंध देखें। मिश्र वाक्य के आश्रित उपवाक्य को अलग कर देने पर वह उसी आशय में पूर्ण स्वतंत्र कथन नहीं देता।

5. वाक्य रूपांतरण की विधि

रूपांतरण में मूल अर्थ की रक्षा सबसे महत्त्वपूर्ण है। पहले कारण, समय, शर्त, उद्देश्य या विरोध पहचानें; फिर उसी संबंध की नई संरचना बनाएँ। ‘बीमार होने के कारण वह नहीं आया’ को ‘वह बीमार था, इसलिए नहीं आया’ बना सकते हैं। यह सरल से संयुक्त रूपांतरण है।

‘जैसे ही घंटी बजी, विद्यार्थी बाहर आए’ का सरल रूप ‘घंटी बजते ही विद्यार्थी बाहर आए’ है। तुरंत होने का अर्थ बनाए रखने के लिए ही महत्त्वपूर्ण है। ‘विद्यार्थी घंटी बजने से पहले बाहर आए’ कहना समय-संबंध बदल देगा।

‘वह मेहनती है, लेकिन सफल नहीं हुआ’ का सरल रूप ‘मेहनती होने पर भी वह सफल नहीं हुआ’ हो सकता है। निषेध हटाकर ‘सफल हुआ’ लिखने से विचार उलट जाएगा। ‘यदि तुम अभ्यास करोगे, तो सुधार होगा’ को ‘अभ्यास करने पर सुधार होगा’ करने में शर्त सुरक्षित है; ‘अभ्यास नहीं करने पर’ जोड़ना अनुचित परिवर्तन है।

6. वाच्य और प्रधानता

वाच्य क्रिया की रचना में कर्ता, कर्म या भाव की प्रधानता का बोध कराता है। कर्तृवाच्य में कर्ता की भूमिका सामने होती है: ‘कविता ने पत्र लिखा।’ कर्मवाच्य में कर्म प्रमुख बनता है: ‘कविता द्वारा पत्र लिखा गया।’ केवल कर्ता के साथ द्वारा जोड़ देना पर्याप्त नहीं; उपयुक्त क्रियारूप भी चाहिए।

कर्मवाच्य में सकर्मक क्रिया का कर्म नया व्याकरणिक केंद्र बनता है। ‘छात्रों ने पुस्तकें पढ़ीं’ से ‘छात्रों द्वारा पुस्तकें पढ़ी गईं’ बनता है। पुस्तकें स्त्रीलिंग बहुवचन है, इसलिए पढ़ी गईं का मेल आवश्यक है। ‘पढ़ा गया’ लिखने से अन्विति बिगड़ेगी।

भाववाच्य में क्रिया का भाव प्रमुख होता है और क्रिया सामान्यतः पुल्लिंग एकवचन रूप में रहती है। ‘मैं अब नहीं दौड़ सकता’ का भावप्रधान प्रयोग ‘मुझसे अब दौड़ा नहीं जाता’ है। यहाँ किसी कर्म को प्रधान नहीं बनाया गया। अकर्मक क्रिया के भाववाच्य और सकर्मक क्रिया के कर्मवाच्य को अलग समझें।

वाच्य परिवर्तन में काल, निषेध, सामर्थ्य और मूल आशय बचाएँ। ‘लिखा गया’ को ‘लिखा जाएगा’ करने से भूतकाल भविष्यकाल बन जाएगा। अपनी पाठ्यपुस्तक में स्वीकृत परिवर्तन-पद्धति का पालन करें, विशेषकर असमर्थता के प्रयोगों में।

7. अन्विति और अशुद्धि-संशोधन

अन्विति पदों के बीच लिंग, वचन, पुरुष आदि का उचित मेल है। ‘लड़कियाँ आ गया’ के स्थान पर ‘लड़कियाँ आ गईं’ होगा। ‘आप कब आएगा?’ के स्थान पर ‘आप कब आएँगे?’ सम्मानसूचक बहुवचन का मेल रखता है।

सकर्मक पूर्ण भूतकाल में ने वाले कर्ता के साथ क्रिया कई बार चिह्नरहित कर्म के अनुसार आती है: ‘रीमा ने पुस्तक पढ़ी।’ ‘रीमा ने पत्र पढ़ा।’ जब कर्म पर को लगा हो, तो सामान्य रूप मिलता है: ‘रीमा ने बहन को बुलाया।’ इसलिए हर स्थिति में क्रिया कर्ता के लिंग से नहीं मिलती।

अशुद्ध प्रयोग

शुद्ध प्रयोग

आधार

उसने मुझे सहायता की

उसने मेरी सहायता की

संज्ञा सहायता के साथ संबंध का सही रूप

वह वापस पुनः लौटा

वह वापस लौटा

अनावश्यक पुनरावृत्ति हटाना

मेरे को पुस्तक चाहिए

मुझे पुस्तक चाहिए

मानक कारक-रूप

लड़कियाँ गीत गा रहा है

लड़कियाँ गीत गा रही हैं

लिंग और वचन का मेल

संशोधन में केवल आवश्यक अंश बदलें। पूरी बात बदल देना शुद्धि नहीं है। यदि वाक्य में तथ्य नहीं, व्याकरण पूछा गया है तो बाहरी ज्ञान से उत्तर न बदलें।

8. मुहावरे: अर्थ और संदर्भ

मुहावरा स्थिर वाक्यांश है जिसका अर्थ शब्दों के अलग-अलग सामान्य अर्थों से अधिक होता है। ‘हाथ-पाँव फूलना’ का अर्थ घबरा जाना है। ‘प्रस्तुति की बारी आते ही उसके हाथ-पाँव फूल गए’ उचित प्रयोग है। इसे शरीर के सचमुच फूलने का विवरण न मानें।

‘कमर कसना’ तैयारी करना, ‘आँखों का तारा’ अत्यंत प्रिय, ‘नाक कटना’ प्रतिष्ठा घटना, ‘आँख खुलना’ वास्तविकता समझ में आना और ‘नौ दो ग्यारह होना’ भाग जाना है। प्रयोग में संदर्भ अर्थ स्पष्ट करे: ‘असफल अभ्यास के बाद समूह ने प्रतियोगिता के लिए कमर कस ली।’ केवल ‘कमर कसना अच्छा है’ लिखने से अर्थ स्पष्ट नहीं होता।

मुहावरे का रूप वाक्य के काल और कर्ता के अनुसार बदल सकता है, पर उसका मूल अर्थ न बिगाड़ें। ‘उसकी आँखें खुल गईं’ समझ आने के अर्थ में हो सकता है; ‘सुबह उसकी आँखें खुलीं’ वास्तविक जागने का साधारण अर्थ भी देता है। प्रसंग देखकर तय करें कि प्रयोग मुहावरेदार है या शाब्दिक।

प्रश्न हल करने की विधि

  1. प्रश्न में अर्थगत भेद, रचना, वाच्य या संशोधन की माँग पहचानें।

  2. मुख्य क्रियात्मक केंद्र और उपवाक्यों की सीमा देखें।

  3. स्वतंत्रता या आश्रय के संबंध से संरचना तय करें।

  4. रूपांतरण में समय, कारण, शर्त, विरोध और निषेध सुरक्षित रखें।

  5. वाच्य में प्रधानता के साथ क्रिया की अन्विति जाँचें।

  6. मुहावरे को पूरे प्रसंग में रखकर अर्थ और रूप की पुष्टि करें।

सम्बन्ध

  • शब्द और पद-रचना में सीखी भूमिका यहाँ कर्ता, कर्म और विधेय की पहचान में काम आती है।

  • व्यावहारिक लेखन में विनम्र अनुरोध, स्पष्ट शर्त और शुद्ध अन्विति आवश्यक हैं।

  • साहित्य में संयुक्त वाक्य, प्रश्न और मुहावरों से शैली तथा चरित्र की भाषा समझ आती है।

सामान्य त्रुटियाँ

  • लंबे वाक्य को अपने आप मिश्र मान लेना; उपवाक्यों का वास्तविक संबंध देखें।

  • रूपांतरण में नहीं या ही हटा देना; इससे मूल अर्थ बदल सकता है।

  • कर्मवाच्य में केवल द्वारा जोड़ देना; क्रिया का रूप और मेल भी बदलें।

  • मुहावरे का शब्दशः अर्थ लेना; प्रसंग में स्थापित अर्थ पहचानें।

पुनरावृत्ति सूची

  • मैं उद्देश्य, विधेय और उपवाक्य पहचान सकता/सकती हूँ।

  • मैं अर्थ तथा रचना के अनुसार वाक्यभेद बता सकता/सकती हूँ।

  • मैं मूल अर्थ बचाकर वाक्य रूपांतरित कर सकता/सकती हूँ।

  • मैं वाच्य के साथ उपयुक्त क्रियारूप और अन्विति रख सकता/सकती हूँ।

  • मैं अशुद्ध प्रयोग का कारण देकर संशोधन कर सकता/सकती हूँ।

  • मैं मुहावरे को सही अर्थ वाले संदर्भ में प्रयोग कर सकता/सकती हूँ।

Practise this topic →

Discussion

Sign in to join the discussion.

Sign in

No comments yet. Be the first to share your thoughts.